कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
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Karnataka Cabinet Reshuffle: कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार में नए चेहरों को शामिल करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि मंत्रिमंडल में बदलाव का अंतिम फैसला पूरी तरह से कांग्रेस आलाकमान और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के विवेक पर निर्भर है। हालांकि, पर्दे के पीछे की राजनीति अब सड़क और बैठकों तक आ गई है।
विधायकों की बढ़ रही महत्वाकांक्षा
पिछले कुछ दिनों से असंतुष्ट और अनुभवी विधायकों का एक बड़ा गुट सक्रिय हो गया है। लगभग 40 ऐसे विधायक हैं जो तीन या उससे अधिक बार चुनाव जीत चुके हैं। इन सभी विधायकों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी दावेदारी पेश की। विधायकों का तर्क है कि उन्होंने पार्टी के लिए लंबा समय दिया है और अब उन्हें प्रशासन में अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलना चाहिए। गृह मंत्री परमेश्वर ने कहा, "राजनीति में पद की आकांक्षा रखना स्वाभाविक है। यदि विधायक मंत्री पद मांग रहे हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन अंतिम निर्णय आलाकमान ही लेगा।"
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दिल्ली कूच की तैयारी में विधायक
सूत्रों के मुताबिक, सभी विधायकों ने एक बड़ी रणनीति तैयार की है। 9 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव के ठीक बाद पूरा गुट दिल्ली जाएगा। वहां ये नेता कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व से मिलकर कम से कम 20 नए मंत्रियों को शामिल करने का दबाव बनाएंगे। वर्तमान में कर्नाटक कैबिनेट में दो पद खाली हैं। एक बी. नागेंद्र के इस्तीफे और दूसरा के.एन. राजन्ना को हटाए जाने के बाद यह दोनों पद खाली हुआ था.
उपचुनाव का गणित
बागलकोट और दावणगेरे दक्षिण विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों को लेकर भी सरगर्मी तेज है। दावणगेरे दक्षिण में जहां अल्पसंख्यक समुदाय टिकट की मांग कर रहा है, वहीं बागलकोट में दिवंगत विधायक मेटी के परिवार को प्राथमिकता देने की चर्चा है। परमेश्वर ने साफ किया कि 'जिताऊ उम्मीदवार' ही टिकट का मुख्य आधार होगा। एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला का वर्तमान बंगलुरु दौरा भी इसी उथल-पुथल से जोड़कर देखा जा रहा है।