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कर्नाटक सरकार ने गो हत्या रोकने वाले विधेयक को दी मंजूरी, अब राज्यपाल के पास भेजा जाएगा

Mon, 28 Dec 2020 09:46 PM IST
दीप्ति मिश्रा पीटीआई, बेंगलुरु
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सांकेतिक तस्वीर
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कर्नाटक सरकार ने सोमवार को विवादास्पद गोहत्या-रोधी विधेयक को लागू करने की मंजूरी दे दी है। विधेयक को अभी विधान परिषद की मंजूरी मिलनी बाकी है। इसके बाद इसे राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल के हस्ताक्षर करने के बाद कर्नाटक में गो हत्या दंडनीय अपराध बन जाएगी। हालांकि, बूचड़खाने संचालित होते रहेंगे और भैंस के मांस के सेवन पर प्रतिबंध नहीं रहेगा।

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विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री जेसी मधुस्वामी ने कहा, '' गोहत्या-रोधी कानून नया नहीं है। यह दशकों से लागू है। अब तक, 13 वर्ष की आयु तक की गायों की गोकशी पर प्रतिबंध था। हमने इसे इस इरादे के साथ विस्तार दिया है कि बूढ़ी गायों को भी इस दायरे में लाया जाना चाहिए। हालांकि, ‘बीफ’ के सेवन पर प्रतिबंध नहीं होगा क्योंकि भैंस पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।''

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि राज्यपाल की मंजूरी के लिए अध्यादेश को तत्काल उनके समक्ष भेजा जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार गोशाला स्थापित करने पर भी विचार कर रही है ताकि दूध नहीं देने वाली बूढ़ी गाय किसानों पर बोझ नहीं रहें। उल्लेखनीय है कि 'कर्नाटक मवेशी वध रोकथाम एवं संरक्षण विधेयक 2020' के अंतर्गत अपराधी के खिलाफ अधिकतम सात वर्ष कैद की सजा और पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
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बता दें कि गो वध पर रोक लगाने की व्यवस्था कायम करने के साथ ही सरकार गोशाला के निर्माण के लिए भी कार्य कर रही है। इसलिए दूध नहीं देने वाली गायें अब किसानों के लिए समस्या नहीं रहेंगी। किसानों की ज्यादा उम्र वाली गाय सरकारी गोशाला में रखी जाएगी। राज्य सरकार के लंबित पशु हत्या निरोधक एवं संरक्षण विधेयक में गो हत्या के लिए सात साल कैद की सजा और पांच लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक के कानून में तब्दील होने पर राज्य में गो हत्या पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। कानून बनने तक सरकार का अध्यादेश को लागू रखने का विचार है।

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