क्या बागलकोट उपचुनाव सत्ता की साख तय करेगा? क्या सहानुभूति वोट असर दिखाएंगे? कर्नाटक में उपचुनाव से पहले सियासत गरमा गई है। बागलकोट और दावणगेरे साउथ सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, जो विधायकों के निधन के बाद खाली हुई हैं। इस चुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों पूरी ताकत से मैदान में हैं और मतदाताओं को लुभाने के लिए जोरदार प्रचार कर रही हैं।
कर्नाटक में होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। बागलकोट में सोमवार को सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा दोनों ने जोरदार चुनाव प्रचार किया और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश की। बागलकोट और दावणगेरे साउथ विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होना है। ये उपचुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि यहां के मौजूदा विधायकों एचवाई मेटी और शमनूर शिवशंकरप्पा का निधन हो गया था।
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बता दें कि इस चुनाव में अपनी दावेदारी प्रबल करने के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया बागलकोट पहुंचे और कांग्रेस उम्मीदवार उमेश मेटी (एचवाई मेटी के बेटे) के लिए प्रचार किया। उन्होंने लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे ऐसा वोट दें जैसे वह खुद चुनाव लड़ रहे हों। उन्होंने अपने भाषण में सरकार की योजनाओं और पांच गारंटी का भी जिक्र किया और कहा कि इससे गरीब परिवारों को हर महीने आर्थिक मदद मिल रही है।
सिद्धारमैया ने भाजपा पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि 2019 से 2023 तक राज्य में कोई खास विकास नहीं हुआ। उन्होंने अलमट्टी बांध की ऊंचाई बढ़ाने के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि जरूरी मंजूरी अब तक नहीं दी गई।
चुनावी रण में भाजपा ने भी फूंका बिगुल
कांग्रेस के बाद दूसरी तरफ भाजपा ने भी जोरदार प्रचार किया। पार्टी के नेता बीवाई विजयेंद्र ने दावा किया कि बागलकोट में माहौल भाजपा के पक्ष में है और उनके उम्मीदवार वीरन्ना चारंतिमठ आसानी से जीतेंगे। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह पैसे और ताकत का इस्तेमाल कर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। भाजपा का यह भी कहना है कि कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता भी अंदरखाने उनके उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं। कुल मिलाकर, बागलकोट और दावणगेरे साउथ के उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। अब देखना होगा कि 9 अप्रैल को जनता किसे अपना समर्थन देती है।