कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों सड़कों पर गड्ढे चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर गड्ढों को लेकर बंगलूरू में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस सरकार के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन येलहंका इलाके में हुआ। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व येलहंका विधासभा क्षेत्र से भाजपा विधायक एसआर विश्वनाथ ने किया।
भाजपा नेता एनएल नरेंद्र बाबू ने कहा, बंगलूरू को कभी सेवानिवृत्त लोगों का स्वर्ग, आईटी शहर और बीटी शहर कहा जाता था। लेकिन आज यह 'गड्ढों का शहर' बन गया है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? मौजूदा सरकार ही जिम्मेदार, जिसके मुख्यमंत्री ने हाल ही में कहा था कि एक महीने के भीतर सारे गड्ढे भर दिए जाएंगे। लेकिन इतने दिनों से वे क्या कर रहे थे?
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उन्होंने आगे कहा, यहां तक कि उपमुख्यमंत्री (डीके शिवकुमार) ने भी अधिकारियों को चेतावनी दी थी। लेकिन फिर भी कुछ नहीं हो रहा है। अधिकारी सड़कों पर दिखाई ही नहीं दे रहे। बंगलूरू की सड़कें और फुटपाथ दोनों की हालत बहुत खराब है। इसलिए हम सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं और खुद ही गड्ढे भर रहे हैं।
सड़कों पर गड्ढों की समस्या केवल कर्नाटक में ही नहीं: शिवकुमार
एक दिन पहले उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा था कि गड्ढों की समस्या केवल उनके राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। इसमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी शामिल है। उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि केवल कर्नाटक को ही इस समस्या के लिए बदनाम करना उचित नहीं है।
बंगलूरू के विकास मामलों के प्रभारी मंत्री शिवकुमार ने कहा था कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सड़कों की हालत सुधारे और वह इस पर काम कर रही है। उन्होंने विपक्षी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि जब वह सत्ता में थी, तब उसने सड़कों की मरम्मत नहीं की और अब जब स्थानीय चुनाव नजदीक हैं, तो इस मुद्दे को उठाया जा रहा है।
कहां से अचानक चर्चा में सड़कों पर गड्ढों का मुद्दा?
शिवकुमार की यह टिप्पणी तब आई थी, जब इंफोसिस के मुख्य वित्तीय अधिकारी मोहनदार पाई और बायोकॉन के प्रमुख किरण मजूमदार जैसे बंगलूरू के उद्योगपतियों ने सरकार से अपील की कि वह सड़कों की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाए। दरअसल, ऑनलाइन ट्रैकिंग कंपनी ब्लैकबक ने बंगलूर के बेलंदूर स्थित अपने दफ्तर को खराब सड़क और यातायात समस्याओं के कारण वहां से हटाने का फैसला लिया है।