कावेरी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के विरोध में कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन अब मुखर हो गया है। शीर्ष अदालत के आदेशों के विरोध में आज कर्नाटक में बंद का आह्वान किया गया जिसके कारण राज्य में जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। हालांकि इसका असर मिला जुला ही देखने को मिला, जहां बंगलुरू और मैसूर जैसे बड़े शहरों में तो सबकुछ ठप रहा वहीं छोटे जिलों में बंद का आंशिक असर रहा।
खासकर राजधानी बंगलुरू में तो व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी नजर आई। आईटी सिटी के रूप में विख्यात शहर में तमाम प्राइवेट संस्थानों में आज छुट्टी रही। सरकारी ऑफिस खुले जरूर लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह ठप होने के कारण कर्मचारी अपने ऑफिसों तक नहीं पहुंच पाए।
नतीजतन वहां भी उपस्थिति ना के बराबर रही। शहर में विप्रो, इन्फोसिस सहित 400 से ज्यादा नेशनल और मल्टीनेशनल कंपनियों में छुट्टी रही। अगर कहीं कोई ऑफिस खुला भी तो विरोध प्रदर्शन करने वालों ने उसे जबरन बंद करा दिया।
बंगलुरू-मैसूर में जनजीवन पूरी तरह ठप, स्कूल बंद कंपनियों में रही छुट्टी
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बंगलुरू में सुबह मेट्रो ट्रेन भी बंद रही। आलम ये रहा कि एयरपोर्ट जाने के लिए टैक्सी तक लोगों को नहीं मिल सकी। वहीं कई स्थानीय न्यूज चैनलों में भी काम ठप रहा। स्कूल कालेजों में भी छुट्टी का आलम रहा। सरकारी कालेज खुले जरूर लेकिन शिक्षकों और बच्चों के न पहुंच पाने के कारण वहां भी छुट्टी जैसी स्थिति रही।
हालांकि सरकारी सूत्रों का दावा है कि जरूरी सामान जैसे दूध और ब्रेड और अस्पताल जैसे जगहें बंद से पूरी तरह अप्रभावित रही। बैंकों और रेस्टोरेंट भी विरोध प्रदर्शनों के कारण बंद ही रहे। वहीं कर्नाटक फिल्म इंडस्ट्री ने भी बंद का समर्थन करते हुए काम बंद रखने का आह्वान किया। कुछ फिल्म स्टार ने तो फिल्म चेंबर ऑफ कॉमर्स के बैनर तले विरोध प्रदर्शन में भी भाग लिया।
बता दें कि कुछ दिन पहले कोर्ट ने लंबे समय से चले आ रहे कावेरी जल विवाद में कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए नदी का जल छोड़ने का आदेश दिया था। जिसके बाद से ही राज्य में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला तेज हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में उतरे कर्नाटक के लोग
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने तो तमिलनाडु के लिए जल छोड़ दिया लेकिन आम जनता के गले यह फैसला नहीं उतरा। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
सोमवार को मांडवा से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन का यह सिलसिला शुक्रवार को कर्नाटक बंद के रूप में सामने आया। हालांकि बंद के आह्वान को देखते हुए राज्य सरकार ने इससे निपटने की पुख्ता तैयारी की थी।
राज्य के मुख्यमंत्री के सिद्धरमैया ने भी ट्वीटर के माध्यम से जनता से अपील की थी कि वे विरोध प्रदर्शन के दौरान अपने राज्य की संपति को ही नुकसान न पहुंचाएं। हालांकि उनकी अपील का कुछ ज्यादा असर होता नहीं दिखा।
जिसके बाद गुरुवार को मुख्यमंत्री ने गृहमंत्री जी परमेश्वरा के साथ राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों संग बैठक की थी। बंद से निपटने के लिए बंगलुरू सेंट्रल फोर्सेज की दस कंपनी तैनात की गईं थी। वहीं इस विवाद को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता एचडी देवगौडा जल्द ही प्रधानमंत्री से मुलाकात करने वाले हैं।