इन सबने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राहुल गांधी दोनों के प्रति अपना भरोसा जताया लेकिन जनता दल (एस) के महासचिव दानिश अली इससे सहमत नहीं हैं। दानिश अली कहते हैं कि जहां भी जद (एस) के उम्मीदवार भाजपा के मुकाबले मजबूत हैं और सीधी लड़ाई में हैं, वहां मुसलमान कांग्रेस को नहीं जद (एस) के साथ है। कांग्रेस और सिद्धारमैया के प्रति झुकाव कुछ इसी तरह का संकेत कुर्बा और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं ने दिया। इनका कहना था कि सिद्धारमैया सरकार ने किसानों, पिछड़े वर्गों के लिए बहुत काम किया है। इसलिए उन्हें फिर मौका मिलना चाहिए। जबकि दलित मतदाताओं में कांग्रेस, भाजपा और जद (एस) तीनों के प्रति ही झुकाव का संकेत अलग अलग क्षेत्रों में मिला।
सिद्धारमैया के चुनाव क्षेत्र चामुंडेश्वरी के कुमारबिद्दू गांव में मंदिर के पास बैठे दलित और नायक समुदाय के वेंकटेश, रघु, कृष्णा, महादेवा, सुरेश, अपूर्वा,रवि आदि ने मिली जुली राय दी। ज्यादातर ने जद (एस) के पक्ष में बात की वहीं कुछ ने कहा कि सिद्धारमैया से शिकायत तो है पर विधायक की जगह मुख्यमंत्री चुनना ज्यादा बेहतर है। जबकि इसी क्षेत्र में वोक्कालिंगा समुदाय के लिंगप्पा, जगदीश, कलाचारी, वासवन्ना, महादेवा ने जद (एस) के साथ मजबूती से जमे होने की बात कही। किसानी करने वाले रामचंद्रा और ईश्वर का झुकाव भी जद (एस) की तरफ ही दिखा। जेटियाहुंडी गांव के दलित मजदूर स्वामी नायक, कुमारअन्ना और राजन्ना ने कांग्रेस और जद(एस) में मुकाबले की बात कही।
लेकिन जैसे ही आप चिकमंगलूर श्रृंगेरी, शिमोगा जिलों में दाखिल होते हैं, तस्वीर बदलने लगती है और जद (एस) की जगह कांग्रेस के साथ भाजपा मुकाबले में आ जाती है। यहां लिंगायतों, शहर में अन्य वर्गों से बात करने पर लोग भाजपा और कांग्रेस की ही बात करते हैं। नागराज रेड्डी, नागभूषण, नागेश्वर राव आदि की पसंद भाजपा है। लेकिन शहर से निकलकर गांवों में किसानों विशेषकर पिछड़े वर्ग के किसानों से बात करने पर फिर कांग्रेस के प्रति उनका रुझान दिखाई पड़ता है। गावों में कई एसे लोग भी मिलते हैं जो मोदी से प्रभावित हैं, लेकिन कहते हैं कि जब लोकसभा का चुनाव होगा तब उन्हें वोट देंगे। अभी राज्य और क्षेत्र के हिसाब से फैसला करेंगे।