हाल ही में खत्म हुआ कर्नाटक विधानसभा चुनाव देश का अब तक का सबसे महंगा चुनाव रहा है। शोध संगठन द सेंटर फार मीडिया स्टडीज (सीएमएस) ने यह आकलन राजनीतिक दलों और उनके प्रत्याशियों के खर्चों के आधार पर किया है। उसने चुनावी प्रक्रिया को धन उड़ाने वाला करार दिया।
सीएमएस के अनुसार, कर्नाटक चुनाव में दलों और उम्मीदवारों ने करीब 9500-10500 करोड़ रुपये खर्च किए जोकि 2013 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। सर्वे में दावा किया गया है कि इसमें प्रधानमंत्री के प्रचार अभियान का खर्च शामिल नहीं किया गया है। उम्मीदवारों का कुल चुनाव खर्च में हिस्सेदारी 75 फीसदी तक है।
संगठन ने पिछले 20 सालों में हुए कर्नाटक समेत अन्य राज्यों में हुए चुनाव में खर्च का अध्ययन किया। इसके आधार पर उसका कहना है कि कर्नाटक का चुनाव खर्च ज्यादातर अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है। कर्नाटक के बाद चुनाव में पैसा खर्च करने के मामले में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का नंबर आता है।
2019 के आम चुनाव का खर्चा होगा 60 हजार करोड़ तक
सीएमएस के एन भास्कर राव के मुताबिक, इस रेट से 2019 के लोकसभा चुनाव में विभिन्न पार्टियों और प्रत्याशियों का खर्चा 50000-60000 करोड़ रुपये आएगा जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में 30000 करोड़ ही खर्च हुए थे। अगले साल होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवारों के खर्च का आंकड़ा 55-60 फीसदी होने की संभावना है जबकि राजनीतिक दलों के खर्च के 29-30 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।