कर्नाटक सरकार ने बुधवार को आदेश जारी कर छात्रों को पूरे राज्य के स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में तय यूनिफॉर्म के साथ कुछ सीमित पारंपरिक और धार्मिक प्रतीक, जैसे हिजाब/हेडस्कार्फ़, पगड़ी, 'जनेऊ' (पवित्र धागा), शिवधारा और रुद्राक्ष पहनने की अनुमति दे दी है। पिछली भाजपा सरकार द्वारा 5 फरवरी, 2022 को जारी आदेश में शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
सिद्धारमैया सरकार ने बुधवार को नए दिशा-निर्देश जारी किए, जिसमें छात्रों को तय यूनिफॉर्म के साथ कुछ सीमित पारंपरिक और धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति दी गई, साथ ही संस्थागत अनुशासन, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और शिक्षा तक समान पहुंच की बात कही गई।
सरकारी आदेश में क्या?
आदेश में कहा गया है कि किसी भी छात्र को केवल इसलिए शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए या उसके साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उसने ऐसे पारंपरिक या धार्मिक प्रतीक पहने हैं जिनकी अनुमति है और जो अनुशासन, सुरक्षा या पहचान में कोई बाधा नहीं डालते। अनुमति प्राप्त पारंपरिक और धार्मिक प्रतीकों में ऐसी चीजें शामिल हो सकती हैं जिन्हें छात्र आमतौर पर पहनते हैं, जैसे पगड़ी, जनेऊ, शिवधारा, रुद्राक्ष, हिजाब या इसी तरह के अन्य रूप।
सरकार ने कहा, शिक्षा छात्रों के सर्वांगीण विकास, मानसिक तनाव को कम करने, संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने और एक वैज्ञानिक, धर्मनिरपेक्ष और समावेशी दृष्टिकोण विकसित करने का एक प्रमुख साधन है। शिक्षण संस्थान ऐसे संवैधानिक स्थान हैं, जहां छात्र "वैज्ञानिक सोच, तर्कसंगत विचार, समानता, गरिमा, भाईचारा, अनुशासन, आपसी सम्मान, सामाजिक सद्भाव और एक संवैधानिक लोकतंत्र में जिम्मेदार नागरिकता" सीखते हैं।
आदेश में कहा गया कि पिछला आदेश यूनिफॉर्म और ड्रेस कोड से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में जारी किया गया था, लेकिन उसके कार्यान्वयन के दौरान अलग-अलग समुदायों के छात्रों द्वारा अपनाई जाने वाली कुछ सीमित पारंपरिक और धार्मिक प्रथाओं के संबंध में चिंताएं सामने आई थीं। समीक्षा के बाद, सरकार इस राय पर पहुंची कि ऐसी सीमित प्रथाओं की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते वे संस्थागत अनुशासन को भंग न करें, और वे एकरूपता या पहचान पर कोई असर न डालें, तथा अनुशासन, सुरक्षा, शिक्षण या सार्वजनिक व्यवस्था में कोई बाधा न डालें।"
कर्नाटक सरकार के आदेश में कहा गया, संवैधानिक अर्थ में धर्मनिरपेक्षता का मतलब व्यक्तिगत मान्यताओं का विरोध करना नहीं है, बल्कि इसका अर्थ है सभी का समान सम्मान, संस्थागत तटस्थता और बिना किसी भेदभाव के आचरण करना है। सरकार ने आगे कहा कि किसी भी छात्र को अनुमति प्राप्त प्रतीक पहनने के आधार पर कक्षाओं, परीक्षाओं या शैक्षणिक गतिविधियों में प्रवेश से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इस आदेश में स्कूल विकास और निगरानी समितियों, कॉलेज विकास समितियों, प्रबंधन और संस्थानों के प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि किसी भी छात्र को किसी भी तरह के भेदभाव या अपमान का सामना न करना पड़े।