कांग्रेस सरकार अपने आदेश का बचाव करने के लिए शेट्टार के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा जारी साल 2013 में जारी उस सर्कुलर का हवाला दे रही है, जिसमें स्कूल परिसर और उससे जुड़े खेल के मैदानों का इस्तेमाल केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए करने का आदेश दिया गया था।
कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने राज्य में संघ की गतिविधियों को प्रतिबंध करने वाला आदेश जारी किया है, जिस पर राज्य की राजनीति गरमा गई है। सिद्धारमैया ने दावा किया कि यह आदेश नया नहीं है और पूर्व की भाजपा सरकार ने ही यह आदेश पारित किया था। अब सिद्धारमैया के इस दावे पर भाजपा के पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया।
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सिद्धारमैया का दावा- भाजपा सरकार में लागू हुआ आदेश
राज्य सरकार ने शनिवार को एक आदेश जारी किया था जिसमें किसी भी निजी संगठन, संघ या व्यक्तियों के समूह द्वारा अपनी गतिविधियों के लिए सरकारी संपत्ति या परिसरों का उपयोग करने हेतु पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई थी। हालांकि सरकारी आदेश में आरएसएस का नाम स्पष्ट रूप से नहीं है, लेकिन कहा जा रहा है कि आदेश के प्रावधानों का उद्देश्य संघ की गतिविधियों, जिसमें उसके रूट मार्च भी शामिल हैं, को प्रभावित करना है।
कांग्रेस सरकार अपने आदेश का बचाव करने के लिए शेट्टार के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा जारी साल 2013 में जारी उस सर्कुलर का हवाला दे रही है, जिसमें स्कूल परिसर और उससे जुड़े खेल के मैदानों का इस्तेमाल केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए करने का आदेश दिया गया था। विपक्ष द्वारा सरकार पर संघ को निशाना बनाने के आरोपों पर सत्तारूढ़ कांग्रेस कह रही है कि वह केवल पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के फैसले को लागू कर रही है।
शेट्टार ने सिद्धारमैया के दावों को खारिज किया
शेट्टार ने हुबली में मीडिया से बात करते हुए कहा, 'वे (सरकार) अब दावा कर रहे हैं कि वे उस आदेश को जारी रख रहे हैं जो भाजपा सरकार ने जगदीश शेट्टार के मुख्यमंत्री रहते जारी किया था। यह कोई आदेश ही नहीं था, जब किसी संगठन ने अपनी गतिविधियों के लिए स्कूल परिसर के इस्तेमाल की अनुमति मांगी, तो शिक्षा विभाग ने एक सर्कुलर के रूप में अनुमति देने से इनकार कर दिया था।' कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, 'जब मैं मुख्यमंत्री था, तब यह कैबिनेट द्वारा लिया गया कोई फैसला नहीं था। यह पूरे राज्य के लिए कोई सामान्य सर्कुलर भी नहीं था, और इसमें आरएसएस का कोई जिक्र नहीं था।'