सुप्रीम कोर्ट से उपचुनाव लड़ने की राहत मिलने के बाद बृहस्पतिवार को सभी 17 बागी विधायक भाजपा में शामिल होंगे। कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री अश्वत्थ नारायण ने कहा, विधायकों ने नई दिल्ली में भाजपा राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष से मिलकर पार्टी में शामिल होने की इच्छा जाहिर की। इन्हें अब बृहस्पतिवार को सुबह 10.30 बजे मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा व प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कटील की मौजूदगी में भाजपा में शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने शीर्ष कोर्ट द्वारा बागी विधायकों को उपचुनाव लड़ने की अनुमति देने के फैसले का स्वागत किया। येदियुरप्पा ने भरोसा जताया कि भाजपा पांच दिसंबर को होने वाले उपचुनाव में सभी 15 सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा, शीर्ष कोर्ट का फैसला पूर्व स्पीकर और सिद्धरमैया की साजिश के खिलाफ आया है। इस फैसले पर अयोग्य घोषित बागी विधायकों ने भी खुशी जताई। जेडीएस से विधायक एएच विश्वनाथ ने कहा, यह फैसला हमारे लिए बहुत जरूरी है। हम इसका स्वागत करते हैं। इनके अलावा अन्य विधायकों ने भी इस फैसले पर खुशी जताई है।
कांग्रेस ने की येदियुरप्पा सरकार बर्खास्त करने की मांग
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने येदियुरप्पा सरकार पर निशाना साधते हुए उसे बर्खास्त करने की मांग की। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया है कि विधायकों को अयोग्य ठहराना सही है। ऐसे में भाजपा का ‘ऑपरेशन कमल’ भी बेनकाब हो गया।
उन्होंने कहा, येदियुरप्पा सरकार कानून और संविधान के लिहाज से एक नाजायज सरकार है और इसे तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। सुरजेवाला ने पूरे मामले में भाजपा नेतृत्व की भूमिका को लेकर जांच की भी मांग की। उन्होंने कहा, जांच होनी चाहिए कि इस खरीद फरोख्त में इस्तेमाल कालाधन कहां से आया, येदियुरप्पा के टेप की भी जांच होनी चाहिए।
वहीं कर्नाटक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडु राव ने कहा, अगर भाजपा में थोड़ी भी नैतिकता बची है तो इन बागी विधायकों को टिकट न दे। पूर्व सीएम सिद्धरमैया ने कहा, हम फैसले का स्वागत करते हैं। शीर्ष कोर्ट ने माना कि जो हुआ वह गलत था और जनता का विश्वास तोड़ा गया।
पूर्व स्पीकर ने ली राहत की सांस
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्नाटक विधानसभा के पूर्व स्पीकर केआर रमेश कुमार ने राहत की सांस ली। कुमार ने कहा, मैंने दसवीं अनुसूची के तहत राजनीतिक और सांविधानिक नैतिकता का पूरा ख्याल रखते हुए विधायकों को अयोग्य घोषित किया था और सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को उचित ठहराया है।