कर्नाटक: मुख्यमंत्री के एलान के बाद भी कांग्रेस में बगावत का डर, क्या MP-राजस्थान जैसा हो सकता है हाल?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Thu, 18 May 2023 05:47 PM IST
सार
कांग्रेस के सामने दो बड़ी मुश्किलें हैं। अगर इसका समाधान जल्द नहीं होता है तो कर्नाटक में कांग्रेस को मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। आइए समझते हैं कर्नाटक का पूरा समीकरण...
कर्नाटक में कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस ने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री का नाम फाइनल कर ही लिया है। सिद्धारमैया ही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे। डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगे। लोकसभा चुनाव तक शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने रहेंगे। 20 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा।
इसके बावजूद पार्टी के सामने दो बड़ी मुश्किलें हैं। अगर इसका समाधान जल्द नहीं होता है तो कर्नाटक में कांग्रेस को मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। आइए समझते हैं कर्नाटक का पूरा समीकरण...
कर्नाटक में कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस ने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री का नाम फाइनल कर ही लिया है। सिद्धारमैया ही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे। डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगे। लोकसभा चुनाव तक शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने रहेंगे। 20 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा।
इसके बावजूद पार्टी के सामने दो बड़ी मुश्किलें हैं। अगर इसका समाधान जल्द नहीं होता है तो कर्नाटक में कांग्रेस को मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। आइए समझते हैं कर्नाटक का पूरा समीकरण...
पहले जानिए अब तक क्या-क्या हुआ?
13 मई को कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। कांग्रेस ने 135 सीटों पर जीत हासिल की। 14 मई को कर्नाटक में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। इसमें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से भेजे गए तीन पर्यवेक्षक भी मौजूद थे। बताया जाता है कि बड़ी संख्या में विधायकों ने इसी बैठक में सिद्धारमैया को सीएम बनाने के लिए अपना समर्थन दे दिया था। हालांकि, बैठक में एक लाइन में प्रस्ताव पास कराया गया कि सीएम पर फैसला मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे। 15 मई को तीनों पर्यवेक्षक दिल्ली पहुंचे और उन्होंने अपनी रिपोर्ट खरगे को दी।
पार्टी ने उसी दिन डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया। सिद्धारमैया दोपहर तक पहुंच गए, लेकिन डीके शिवकुमार जन्मदिन होने की वजह से दिल्ली नहीं पहुंचे। अगले दिन यानी 16 मई को डीके शिवकुमार भी दिल्ली पहुंचे। इसी दिन खरगे के आवास पर कांग्रेस के बड़े नेताओं की बैठक हुई। राहुल गांधी भी इसमें शामिल हुए। इसके बाद खरगे और राहुल ने अलग-अलग शिवकुमार और सिद्धारमैया से बात की, लेकिन कुछ बात नहीं बनी।
17 मई का दिन सबके लिए काफी अहम रहा। इस दिन कई राउंड की बैठकें हुईं। राहुल गांधी ने अपने आवास पर केंद्रीय पर्यवेक्षक भंवर जितेंद्र सिंह, केसी वेणुगोपाल, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। वहीं, कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और बाद में केंद्रीय पर्यवेक्षक सुशील शिंदे के साथ मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक की।
खरगे ने फोन पर सोनिया गांधी से बात की। बाद में सोनिया ने डीके शिवकुमार को खरगे और राहुल से मिलने के लिए कहा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राहुल ने सोनिया गांधी से बात भी कराई। इसके बाद डीके शिवकुमार उप-मुख्यमंत्री पद के लिए मान गए। साथ में उन्हें अध्यक्ष पद पर बने रहने को भी कहा गया।
18 मई की दोपहर 12:30 बजे कांग्रेस ने सिद्धारमैया को सीएम, डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाने का आधिकारिक एलान कर दिया।
अब उन दो चुनौतियों के बारे में जान लीजिए जो कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है
1. पावर क्लैश : सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया को अभी दो साल के लिए मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। इसके बाद कर्नाटक की कमान डीके शिवकुमार को दे दी जाएगी। लेकिन इस बीच पावर क्लैश होना आम होगा। सिद्धारमैया नहीं चाहेंगे कि उनपर डीके शिवकुमार किसी भी तरह से भारी पड़ें और शिवकुमार सिद्धारमैया को खुद से आगे जाने नहीं देना चाहेंगे। ऐसे में इन दो साल के अंदर खुलकर जंग हो सकती है। इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। अगर ये जंग अभी से शुरू हो गई तो आने वाले लोकसभा चुनाव पर इसका भारी असर पड़ सकता है। इस तरह के संघर्ष पार्टी मध्य प्रदेश और राजस्थान में देख चुकी है। इसका उसे नुकसान भी हो चुका है।
2. मंत्रिपद के लिए भी जोर आजमाइश होगी: कांग्रेस में सिर्फ सीएम और डिप्टी सीएम के लिए नहीं, बल्कि मंत्रिपद के लिए भी जोर आजमाइश होगी। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही गुट के विधायक खुद को मंत्री पद पर देखना चाहेंगे।
उधर, दिग्गज नेता और पूर्व डिप्टी सीएम जी परमेश्वर ने भी अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। उन्होंने सिद्धारमैया को सीएम और शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाए जाने के बाद कहा कि इससे दलित समुदाय आहत हुआ है। कर्नाटक में दलित सीएम की डिमांड ज्यादा थी। मैं भी सरकार चला सकता था। अगर सीएम नहीं तो कम से कम मुझे डिप्टी सीएम ही बना देते।
तो क्या भाजपा को इसका फायदा हो सकता है?
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक संजय मिश्र से बात की। उन्होंने कहा, 'अगर समय रहते पार्टी के अंदर का विवाद सुलझ जाता है तो ठीक है, नहीं तो इसका असर आने वाले लोकसभा चुनाव पर जरूर पड़ेगा। समय-समय पर दोनों के बीच विवाद होना लाजिम है। इसका सीधा फायदा भाजपा उठाने की कोशिश करेगी। दो साल बाद अगर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की लड़ाई बढ़ जाती है तो पार्टी में फूट भी पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में भी कांग्रेस को नुकसान होगा।'