करीम खान के बारे में कहानियां कई हैं। पाकिस्तानी पिता और ब्रिटिश मां के पुत्र, वे खुद को पीड़ितों का पक्षधर कहते हैं। लेकिन युद्ध अपराधों के दोषी लाइबेरिया के पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स टेलर जैसों का बचाव भी करते हैं। पुतिन और नेतन्याहू जैसे कद्दावर नेताओं पर उंगली उठाकर सुर्खियों में हैं।
मुस्लिम बाहुल्य वाला लीबिया लगातार करीम असद अहमद खान की आलोचना कर रहा था कि आईसीसी के अभियोजक के रूप में वह फलस्तीन में विध्वंस फैला रहे इस्राइल के खिलाफ कदम क्यों नहीं उठाते। लेकिन अब करीम खान ने युद्ध अपराधों और मानवता विरोधी अभियानों के लिए इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री के साथ हमास के तीन शीर्ष नेताओं याह्या सिनवार, इस्माइल हनियेह और मोहम्मद दीफ की गिरफ्तारी की मांग करते हुए आईसीसी में याचिका दायर कर लीबिया को शांत तो करा दिया है, लेकिन इससे अमेरिका और इस्राइल जैसे ताकतवर देश उनके दुश्मन बन गए हैं। उनके इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के सदस्य देशों में भी असमंजस जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
जब नाम बदलने से किया मना
वर्ष 1992 में बैरिस्टर बनने के लिए आवश्यक व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए खान को बार में बुलाया गया था। साक्षात्कार के बीच में पैनल ने खान के पाकिस्तानी और ब्रिटिश होने के मुद्दे पर बहस करते हुए कहा कि अगर वह अपना नाम स्मिथ रखते हैं, तो उन्हें फायदा मिल सकता है। लेकिन उन्होंने अपना नाम बदलने से मना कर दिया और इंटरव्यू छोड़ दिया था। हालांकि इसके बाद 28 वर्षों तक बैरिस्टरी करते हुए वह ब्रिटेन की महारानी के वकील रहे और पीड़ितों के लिए कुछ सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक मामलों में काम कर चुके हैं।
पुतिन को खड़ा किया कटघरे में
पुतिन के खिलाफ जाने की हिम्मत दुनिया में कम ही लोग कर पाते होंगे। जब करीम खान आईसीसी में अभियोजक के रूप निर्वाचित हुए, तो उन्होंने घोषणा की कि वह यूएनएससी द्वारा अदालत को सौंपे गए मामलों को प्राथमिकता देंगे। लेकिन शुरुआत में ही खान ने बच्चों के गैरकानूनी निर्वासन और यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों से बच्चों के गैरकानूनी स्थानांतरण के आरोप में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और बच्चों के अधिकार के लिए आयुक्त मारिया अलेक्सेयेवना लवोवा-बेलोवा पर तुरंत मुकदमा चलाकर उन्होंने दिखा दिया कि उनके इरादे कुछ और हैं।
दोहरी विरासत
करीम अहमद खान का जन्म 30 मार्च, 1970 को एडिनबर्ग में हुआ था। पिता पाकिस्तान के एक सलाहकार त्वचा विशेषज्ञ और मां इंग्लैंड की एक राज्य पंजीकृत नर्स थीं। वह खुद अल्पसंख्यक 'अहमदिया समुदाय' के संबंध रखते हैं। खान की शिक्षा निजी 'सिलकोट्स स्कूल' (इंग्लैंड के उत्तर में) में हुई थी। इसके बाद उन्होंने 'किंग्स कॉलेज लंदन' में कानून की पढ़ाई की। खान ने दूसरी शादी मलेशियाई वकील दातो श्यामला अलगेंद्र से की है और उनके दो बेटे हैं। उनकी पहली शादी अहमदिया मुस्लिम समुदाय के चौथे खलीफा मिर्जा ताहिर अहमद की बेटी यास्मीन रहमान मोना से हुई थी। खान की एक बहन और दो भाई हैं।
कट्टर मुस्लिम
खान को कट्टर मुस्लिम विचारों का पक्षधर माना जाता है। वह अक्सर सार्वजनिक बयानों में कुरान का हवाला देते हुए "इंशाअल्लाह" शब्द का उपयोग भी करते हैं। इसके बावजूद जब उन्होंने विवादास्पद रूप से केन्या के उपराष्ट्रपति विलियम रुटो के बचाव में वकील के रूप में भी काम किया, जिन पर मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप लगा था, तो उनकी काफी आलोचना हुई। इसके अलावा सिएरा लियोन में युद्ध अपराधों के दोषी लाइबेरिया के पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स टेलर का बचाव करने के लिए भी उन्हें आड़े हाथों लिया गया।
खुद को मानते हैं उदार
खान खुद को "बेजुबानों की जुबान" या "पीड़ितों का चैंपियन" मानते हैं। क्योंकि उन्होंने केन्या, सिएरा लियोन और कैमरून में युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और अन्य अत्याचारों के पीड़ितों का प्रतिनिधित्व किया और सुनिश्चित किया कि पीड़ितों को अच्छा मुआवजा मिले। शुरुआती दिनों में वह रवांडा नरसंहार के ट्रायल्स में शामिल थे। उन्होंने पीड़ितों की मदद के लिए 'ग्लोबल विक्टिम्स इनिशिएटिव' की स्थापना भी की है।
किताबें भी लिखीं करीम असद अहमद खान ने
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून पर कई पुस्तकों का लेखन और सह-लेखन भी किया है। उनकी लिखी प्रसिद्ध पुस्तकें 'इंटेग्रिटी एंड इंडिपेंडेंस इन द डिलीवरी ऑफ एकाउंटबिलिटी', 'ऑन इंटेग्रिटी इन इंटरनेशनल क्रिमिनल जस्टिस' हंै, जबकि आर्चबोल्ड इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट्स (स्वीट एंड मैक्सवेल), प्रिंसिपल ऑफ एविडेंस इन इंटरनेशनल क्रिमिनल लॉ, अ कमेंटरी टू द रोम स्टेचू ऑफ द इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट आदि पुस्तकों का उन्होंने सह-लेखन किया है।