कारगिल विजय दिवस... दुश्मनों से देश की सीमाओं की रक्षा और आन-बान-शान के लिए मर मिटने वाले भारतीय सेना को नमन करने का दिन... आतंकवादियों और पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा देने वाले बहादुर सैनिको की गाथा गाने का दिन... देश के उन बेटों की कहानी जो दुर्गम और ऊंची चोटियों पर भी भारतीय तिरंगे को लहराने के लिए आगे बढ़े तो दुश्मन की गोलियों की बौछार भी उन्हें रोक नहीं सकी। युगों-युगों तक जिनकी कुर्बानी देश याद रखेगा और आने वाली पीढ़ी को भी प्रेरित करेगी।
1971 में भारत-पाक की लड़ाई में पाकिस्तान बुरी तरह से हारा था और उस बेइज्जती का बदला आज भी लेना चाहता है। वही भारत के परमाणु परीक्षण के बाद तनाव और भी बढ़ गया था। स्थिति को सामान्य करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की अध्यक्षता में फरवरी 1999 लाहौर में घोषणा पत्र पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए। जिसमें कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का वादा किया गया था।
60 दिनों तक चलने वाली भयंकर लड़ाई ,दुश्मन को नाकों चने चबवाकर 26 जुलाई 1999 को जाकर खत्म हुई। इस जीत से ना सिर्फ पाकिस्तान की नापाक कारगुजारियों का खुलासा हुआ बल्कि भारत के आगे उसके हौसले ऐसे पस्त हुए कि करगिल की गलती वो फिर नहीं दोहराएगा। लेकिन समझौते की आड़ में पाकिस्तान ने अपने सैनिकों और अर्ध-सैनिक बलों को छिपाकर एलओसी के पार भेजने लगा और घुसपैठ के इस कारनामे को मिशन "ऑपरेशन बद्र" से चलाया था। इसका मुख्य उद्देश्य कश्मीर और लद्दाख के बीच की कड़ी को तोड़ना और भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर से हटाना था। इसके पीछे पाकिस्तान की मंशा किसी भी प्रकार के तनाव से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की थी।
पाकिस्तान के मंसूबों को समझने में सेना और सरकार ने बिल्कुल देरी नहीं की और इसे घुसपैठ मानते हुए कार्रवाई शुरू कर दी। जहां सेना को ये लग रहा था कि कुछ दिनो में घुसपैठियों को खदेड़ दिया जायेगा लेकिन बहुत जल्दी सेना को पाकिस्तान के बहुत बड़े षड्यंत्र का पता चल गया। पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों की नियोजित रणनीति में अंतर का पता चलने के बाद भारतीय सेना को अहसास हो गया कि हमले की योजना बहुत बड़े पैमाने पर किया गया है। पाकिस्तानी सेना आतंकी संगठनों के साथ मिलकर भारतीय सीमा पर कब्जा करना चाहती थी।
11 मई को कारगिल, द्रास और बाल्टिक क्षेत्र में सैकड़ों पाक जवानों के घुसपैठ की पुष्टि हुई और भारतीय सेना ने कारगिल द्रास खाली कराने का अभियान भी शुरू कर किया। भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय नाम से 2,00,000 सैनिकों को एलओसी के अलग अलग मोर्चों पर तैनात कर दिया।
सभी मोर्चों से पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों को हमारे वीर सैनिकों ने चुन चुनकर और खदेड़ कर मार गिराया। जवानों ने जब-जब दुश्मन को मौत के घाट उतारा, तब-तब पूरे देश से आवाज उठी, ये दिल मांगे मोर...। 14 जुलाई, 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऑपरेशन विजय की सफलता की घोषणा की और आधिकारिक तौर पर 26 जुलाई को युद्ध समाप्ति का एलान किया।
520 किलोमीटर के दुर्गम और कठोर मौसम में भी 696 से अधिक घुसपैठियों को मार गिराया और 1500 को देश की सीमा से खदेड़ दिया। इस लड़ाई में हमारे 500 से अधिक जवान शहीद हुए लेकिन उनके खून के एक एक कतरे ने देश की रक्षा की। देश की आन बान शान पर शीश न्योछावर करने वाले हमारे वीर सपूतों...और उनके परिवार को अमर उजाला परिवार सलाम करता है....जय हिंद...जय हिंद की सेना....