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Kapil Sibbal: कानून मंत्री पर कपिल सिब्बल का तंज- क्या आपके विवादित बयान न्यायपालिका को मजबूत बना रहे हैं!

Tue, 24 Jan 2023 12:04 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कानून मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने न्यायपालिका की ताकत को कमतर करने के लिए एक भी कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार और न्यायपालिका के विचारों में अंतर हो सकता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं।
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कपिल सिब्बल ने कानून मंत्री पर कसा तंज - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मंगलवार को एक ट्वीट कर केंद्रीय कानून मंत्री किरन रिजिजू पर तंज कसा है। बता दें कि किरन रिजिजू ने सोमवार को अपने एक बयान में कहा था कि सरकार ने न्यायपालिका की ताकत को कम करने की दिशा में एक भी कदम नहीं उठाया है। इस पर कपिल सिब्बल ने ट्वीट करते हुए तंज  कसा कि आपके विवादित बयान तो न्यायपालिका को मजबूत करने के लिए थे!
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किरन रिजिजू ने सोमवार को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार ने न्यायपालिका की ताकत को कमतर करने के लिए एक भी कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार और न्यायपालिका के विचारों में अंतर हो सकता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं या फिर हमारे बीच महाभारत चल रही है। 

कानून मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने लिखा कि "रिजिजू का एक और नायाब बयान- मोदी सरकार ने न्यायपालिका की ताकत को कम करने की दिशा में एक भी कदम नहीं उठाया है.....क्या आपके विवादित बयान न्यायपालिका को मजबूत करने के लिए थे। आपको ऐसा लग सकता है लेकिन हम वकीलों को नहीं लगता।"
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कॉलेजियम सिस्टम को लेकर केंद्र सरकार और न्यायपालिका में लगातार बयानबाजी सामने आ रही है। सरकार जहां कॉलेजियम सिस्टम में बदलाव की मांग कर रही है, वहीं सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम व्यवस्था को बनाए रखने के पक्ष में है। कानून मंत्री सबसे मुखर होकर न्यायपालिका पर अपनी बात रख रहे हैं। अपने हालिया बयान में भी कानून मंत्री किरन रिजिजू ने न्यायपालिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनता न्यायाधीशों का चुनाव नहीं करती है, इसलिए वह न्यायाधीशों को नहीं बदल सकती, जैसा कि वह सरकारों के मामले में करती है लेकिन जनता आपको  (न्यायाधीशों) देख रही है। वह आपके फैसलों पर, काम के तरीकों पर और आपके न्याय देने के तरीकों पर पैनी नजर रखती है। 
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