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Kapil Sibbal: 'वो तो सरकार की कठपुतली बन गया है', कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

Sun, 13 Jul 2025 01:51 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग को मोदी सरकार की कठपुतली बताया और बिहार में चल रही विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया गरीबों और अल्पसंख्यकों के वोट काटकर बहुसंख्यक सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में आयोग से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
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कपिल सिब्बल - फोटो : ANI
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विस्तार
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राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग (ईसी) पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि यह संस्था अब मोदी सरकार की कठपुतली बन चुकी है। उन्होंने बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया और दावा किया कि यह प्रक्रिया बहुसंख्यकवादी सरकारों को सत्ता में बनाए रखने का प्रयास है।

पूर्व कानून मंत्री सिब्बल ने पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि चुनाव आयोग को नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी ब्लॉक स्तर के अधिकारी के माध्यम से यह तय करना कि कौन नागरिक है और कौन नहीं, संविधान का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया गरीब, दलित और आदिवासी वोटरों के नाम हटाकर बहुसंख्यक सरकार के पक्ष में चुनाव परिणाम तय करने का तरीका है।

हर नया चुनाव आयुक्त सरकार से मेल खाता है- सिब्बल
कपिल सिब्बल ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से चुनाव आयोग की निष्पक्षता खत्म होती गई है। उनका कहना है कि हर नया चुनाव आयुक्त अपने पूर्ववर्ती से भी अधिक सरकार के अनुकूल काम करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब से यह सरकार आई है, आयोग की स्वतंत्रता पर विश्वास करना मुश्किल हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का सिब्बल की चुप्पी
जब उनसे सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम टिप्पणियों पर सवाल किया गया तो सिब्बल ने कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने कहा कि वे खुद इस मामले में अधिवक्ता हैं, इसलिए कोर्ट के निर्देशों पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग कोर्ट की बातों को गंभीरता से लेगा और विवाद को आगे नहीं बढ़ने देगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से कहा है कि वह आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड को SIR में वैध दस्तावेजों के रूप में भी स्वीकार करे। हालांकि आयोग के वकीलों ने इसका विरोध किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वे आयोग को बाध्य नहीं कर रहे, लेकिन आयोग को उचित कारणों के साथ फैसला लेना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग को वह सब करना चाहिए जो संवैधानिक रूप से उसके अधिकार में है, लेकिन जो अधिकार नहीं है, उसमें हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

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28 जुलाई को अगली सुनवाई 
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दाखिल 10 याचिकाओं पर 28 जुलाई को अगली सुनवाई तय की है। कोर्ट ने आयोग को एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। उसके बाद याचिकाकर्ता भी अपना जवाब देंगे। कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए तीन प्रमुख मुद्दों को चिन्हित किया है – आयोग की शक्तियां, प्रक्रिया का तरीका और समय-सीमा। ये तीनों पहलू आने वाली सुनवाई में अहम होंगे।

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