कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया है कि कोरोना के वैश्विक महामारी घोषित होने के बाद भी केंद्र सरकार मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार गिराने की साजिश में लगी हुई थी, जिसके कारण उसने सही समय पर देश में लॉकडाउन की घोषणा नहीं की।
अगर सही समय पर लॉक डाउन लगाया गया होता और इससे निबटने के उचित उपाय किए गए होते तो स्थिति इतनी खराब न होती। उन्होंने कहा कि लॉक डाउन का फैसला भी सबको भरोसे में लिए बगैर लिया गया जिससे सैकड़ों मजदूरों की मौत हुई। इसके लिए केंद्र को जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी।
कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को
अमर उजाला डॉट कॉम से विशेष बातचीत के दौरान कहा कि अगर केंद्र सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा कोरोना को महामारी घोषित किये जाने के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगाया होता तो देश में कोरोना के हालात इतने विकट न होते। उन्होंने कहा कि कोरोना शहरी क्षेत्रों में ही ज्यादा असर दिखा रहा है। अगर मजदूरों को समय से उनके घर जाने दिया गया होता तो वे संक्रमित न होते और यह संक्रमण गांवों तक न फैलता।
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गलत फैसले के कारण लॉकडाउन के दौरान सैकड़ों मजदूरों की दर्दनाक मौत हुई। अगर प्रधानमंत्री ने देश में लॉकडाउन लगाने से पहले राज्यों से विचार-विमर्श किया होता और लोगों की राय मानी होती तो श्रमिकों को इस तरह तकलीफ न उठानी पड़ती। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन लगाने के पहले श्रमिकों को उनके घर जाने का अवसर देना चाहिए था। इसमें ज्यादा समय न लगता, लेकिन इससे हजारों मजदूरों को पैदल अपने घरों को न निकलना पड़ता और रास्ते में उनकी मौतें न होतीं।
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के मुताबिक इस समय पूरी व्यवस्था केंद्र के अधीन होती है। उसे केंद्र राज्य और जिला स्तर पर योजना बनाकर कोरोना को रोकने की कोशिश करनी चाहिए थी, लेकिन केंद्र ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने दिखावा किया है कि उसने कोरोना से निबटने के लिए 20 लाख करोड़ रूपये का पैकेज दिया है। लेकिन अब सभी विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पैकेज अर्थव्यवस्था के एक-दो फीसदी से ज्यादा नहीं है।