केंद्र सरकार आर्थिक मोर्चे, रोजगार की स्थिति, कोरोना की लड़ाई, श्रमिकों की मौत जैसे अनेक मामलों पर घिरी हुई है। विपक्ष अपने स्तर पर इसे उठाने की कोशिश भी कर रहा है। लेकिन इसके बाद भी राष्ट्रीय स्तर पर उसकी आवाज में वह दम और जनता पर उसका असर उस तरह नजर नहीं आ रहा है जैसा कि होना चाहिए। इसके पीछे क्या कारण हो सकता है?
अमर उजाला के इस सवाल पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ ही समय पहले कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर 10 साल सरकार चलाई है। इस सरकार को तो अभी छ: साल ही हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम जनता के मुद्दे उठाएंगे और उसके सहयोग से अगले चुनाव में वापसी करेंगे।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि देखने में तो देश का ढांचा उसी तरह नजर आ रहा है, लेकिन इसे बदलने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए मीडिया के एक वर्ग को अपने कब्जे में कर लिया गया है।
सीबीआई, ईडी और अन्य महत्त्वपूर्ण संस्थाओं में कुछ चुनिन्दा लोगों को भेजकर विपक्ष के नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। यह देश के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसकी कीमत आगे आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ सकता है, इसलिए इस तरह की किसी भी कोशिश को रोकने की कोशिश की जानी चाहिए।