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कपिल सिब्बल ने लगाया आरोप, चीन से तनाव में देश के हितों से समझौता कर रही केंद्र सरकार  

Sun, 12 Jul 2020 06:49 PM IST
मुकेश कुमार झा डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला

सार

केंद्र सरकार अपने देश की सीमा में घुस आए चीनी सैनिकों को पीछे हटाने के लिए जिस जगह पर बफर जोन बनाने की बात कर रही है, वह हमेशा से भारत के हिस्से में रहा है। इस प्रकार बफर जोन बनाने के मामले में भी हम पीछे हट रहे हैं। यह देश के हितों के साथ गंभीर समझौता है।
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कपिल सिब्बल
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विस्तार
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कांग्रेस राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने गलवां घाटी में भारत-चीन के बीच बफर जोन बनाने के मामले में केंद्र सरकार पर देश के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया है।

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उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार अपने देश की सीमा में घुस आए चीनी सैनिकों को पीछे हटाने के लिए जिस जगह पर बफर जोन बनाने की बात कर रही है, वह हमेशा से भारत के हिस्से में रहा है। इस प्रकार बफर जोन बनाने के मामले में भी हम पीछे हट रहे हैं। यह देश के हितों के साथ गंभीर समझौता है।

अमर उजाला डॉट कॉम से विशेष बातचीत के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि दो देशों के बीच के रिश्ते अपनी पूर्ववर्ती सरकारों की बनाई नींव पर आगे बढ़ते हैं। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत संबंधों का कोई महत्त्व नहीं होता। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समझते हैं कि व्यक्तिगत संबंध राष्ट्रीय संबंधों से ऊपर होते हैं।
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राष्ट्रीय महत्त्व के मामलों में उनकी इसी नासमझी का परिणाम है कि जिस समय वे चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग के साथ गुजरात में झूला झूल रहे थे, ठीक उसी समय चीन के सैनिक भारत की जमीन पर कब्जा कर रहे थे। उनके व्यक्तिगत संबंध की लालसा की कीमत देश को चुकानी पड़ी।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के स्थानीय पार्षदों और वहां के चरवाहों ने सरकार को इस कब्जे की जानकारी भी दी थी, लेकिन इसके बाद भी केंद्र सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। इसी का नतीजा हमें भारत-चीन की सीमा पर अपने 20 जवानों की वीरगति के रूप में चुकानी पड़ी है। 1962 से आज तक ऐसी स्थिति कभी नहीं बनी थी। लेकिन आज ऐसा हुआ। सरकार को जवाब देना पड़ेगा कि आज यह स्थिति किन कारणों से आई। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

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विपक्ष की आवाज कमजोर क्यों?

केंद्र सरकार आर्थिक मोर्चे, रोजगार की स्थिति, कोरोना की लड़ाई, श्रमिकों की मौत जैसे अनेक मामलों पर घिरी हुई है। विपक्ष अपने स्तर पर इसे उठाने की कोशिश भी कर रहा है। लेकिन इसके बाद भी राष्ट्रीय स्तर पर उसकी आवाज में वह दम और जनता पर उसका असर उस तरह नजर नहीं आ रहा है जैसा कि होना चाहिए। इसके पीछे क्या कारण हो सकता है? 

अमर उजाला के इस सवाल पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ ही समय पहले कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर 10 साल सरकार चलाई है। इस सरकार को तो अभी छ: साल ही हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम जनता के मुद्दे उठाएंगे और उसके सहयोग से अगले चुनाव में वापसी करेंगे।

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि देखने में तो देश का ढांचा उसी तरह नजर आ रहा है, लेकिन इसे बदलने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए मीडिया के एक वर्ग को अपने कब्जे में कर लिया गया है।

सीबीआई, ईडी और अन्य महत्त्वपूर्ण संस्थाओं में कुछ चुनिन्दा लोगों को भेजकर विपक्ष के नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। यह देश के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसकी कीमत आगे आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ सकता है, इसलिए इस तरह की किसी भी कोशिश को रोकने की कोशिश की जानी चाहिए।     
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