कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस की चुनौती दी है। इस बीच राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शनिवार को प्रस्ताव रखा कि दोनों नेताओं को संसद में अहम मुद्दों पर बिना किसी रुकावट के, सीधे सवाल-जवाब करने चाहिए।
सिब्बल ने गृह मंत्री अमित शाह से उनके रुख में आए बदलाव पर भी सवाल उठाया। पिछले साल दिसंबर में संसद में उन्होंने कहा था कि मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) पर दोनों सदनों में बहस नहीं हो सकती, जबकि गुरुवार को उन्होंने कहा कि सरकार एसआईआर पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है।
कपिल सिब्बल ने क्या कहा?
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने कहा, 'गृह मंत्री ने संसद में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) को लेकर एक अजीब बयान दिया था। जब विपक्ष ने एसआईआर पर संसदीय बहस की मांग की, तो गृह मंत्री ने पूछा कि संसद में इस पर चर्चा क्यों होनी चाहिए? उन्होंने दावा किया कि यह पूरी तरह से चुनाव आयोग का मामला है, जिससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।'
सिब्बल ने क्या सवाल पूछा?
उन्होंने आगे पूछा, 'लेकिन हाल ही में उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी बहस करना चाहते हैं, तो उन्हें विशेष सत्र बुलाने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखना चाहिए। अचानक रुख में यह बदलाव क्यों? अगर अब आप सत्र बुलाने के लिए तैयार हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि एसआईआर वास्तव में आपकी ही जिम्मेदारी है?' संसद सदस्य के रूप में, सिब्बल ने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता को आमने-सामने बैठाया जाए, और इस दौरान किसी अन्य सदस्य को बोलने या बीच में दखल देने की अनुमति न हो।
उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री विपक्ष के नेता से सवाल पूछें, और विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री से सवाल पूछें। यह बातचीत तब तक चलनी चाहिए जब तक जरूरी हो। 12 वर्षों में पहली बार, इससे प्रधानमंत्री को सवालों के जवाब देने का मौका मिलेगा। यह एक ऐतिहासिक मिसाल होगी, क्योंकि दुनिया के इतिहास में ऐसा कहीं नहीं हुआ है कि सरकार के किसी प्रमुख ने 12 वर्षों तक सदन में सवालों के जवाब देने से परहेज किया हो।'
उन्होंने कहा, 'मैं गृह मंत्री से पूछना चाहता हूं। जब विपक्ष ने एसआईआर पर बहस की मांग की थी, तब सदन में आपका क्या रुख था? आपने देश को बताया था कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है क्योंकि यह चुनाव आयोग का मामला है। अब अचानक आपका विचार कैसे बदल गया?'
क्या संसदीय बहसों को कैसे नियंत्रित किया जाता?
वे आगे कहते हैं, 'हम जानते हैं कि संसदीय बहसों को कैसे नियंत्रित किया जाता है। माइक म्यूट कर दिए जाते हैं, विपक्ष के नेताओं को बीच में रोका जाता है, और उनकी आवाज दबा दी जाती है। अगर सरकार एसआईआर पर बहस करना चाहती है, तो गृह मंत्री को पहले रिकॉर्ड पर यह स्वीकार करना चाहिए कि इसके लिए सरकार जिम्मेदार है।'
सिब्बल ने कहा कि इस बहस को एक और ऐतिहासिक घटना बनना चाहिए। गांधी लगातार मोदी को अपने साथ खुली बहस करने की चुनौती दे रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने गारंटी दी है कि पांच मिनट में ही यह साबित हो जाएगा कि प्रधानमंत्री देशद्रोही हैं।