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'पीएम हमारी कुंडली की भविष्यवाणी कर रहे हैं, यूपी में खुलेगी भाजपा की कुंडली'

Thu, 16 Feb 2017 11:23 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने न सिर्फ सपा के आंतरिक महाभारत में मुख्यमंत्री अखिलेश खेमे को चुनाव निशान साइकिल पर कब्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई बल्कि वह सूबे में कांग्रेस-सपा के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन के भी सूत्रधार बने। कपिल सिब्बल ने ‘अमर उजाला’ के राजीव जायसवाल से पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव समेत कई मसलों पर खुल कर बातचीत की। पेश हैं चुनिंदा अंश।
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सवाल - पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन चुनावों में कहां खड़ी है कांग्रेस।

चुनाव में कांग्रेस बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगी। पंजाब, गोवा, उत्तराखंड में हमारी खुद की और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस-सपा गठबंधन की सरकार बनने की संभावना है। जहां तक भाजपा का सवाल है तो प्रधानमंत्री हमारी जन्मकुंडली बाहर लाने की धमकी दे रहे हैं। हालांकि बिहार से इनकी जन्मकुंडली खुलने की शुरुआत हो चुकी है अब दूसरा बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश इनकी कुंडली खोलने के लिए तैयार बैठा है।

परिणाम आने दीजिये। इन्हें पता चलेगा कि नोटबंदी ने इनकी वोट बंदी करा दी है। पंजाब में ये कहीं हैं ही नहीं। गोवा में नोटबंदी के कारण पर्यटन उद्योग के चरमरा जाने और इससे पहले मुख्यमंत्री रहते मनोहर परिकर की ओर से लाई गई खनन नीति ने राज्य को तबाह करके रख दिया। यहां के लोग सबक सिखाने के लिए पहले से ही तैयार बैठे थे।
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सवाल- बात उत्तर प्रदेश की करते हैं। यहां आपने जिस सपा पर पहले निशाना साधा अब उसी के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में हैं। क्या इससे पार्टी को रक्षात्मक रुख नहीं अपनाना पड़ रहा है।

देखिये कांग्रेस ने हमेशा सांप्रदायिकता के खिलाफ  राजनीति की है। हमारी लड़ाई सांप्रदायिक ताकतों से है। इसलिए हमारा मानना है कि भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी के खिलाफ  सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एक हो जाना चाहिए।

सवाल-  मगर भाजपा इस गठबंधन को भ्रष्टाचार और अपराध का गठबंधन बता रही है। फिर सवाल यह है कि क्या आप भी राजनीति में सब चलता है के सिद्घांत पर चल रहे हैं।

वह भाजपा सिद्घांत की बात करती है जिससे बड़ी सिद्घांतविहीन पार्टी ही कोई नहीं है। जम्मू-कश्मीर में क्या किया इस पार्टी ने पहले लगातार बाप; मुफ्ती मोहम्मद सईद और बेटी महबूबा मुफ्ती को जम कर कोसा और राज्य को बर्बाद करने का आरोप लगाया। चुनाव के बाद उसी के साथ सरकार बना ली। इसने अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड में क्या किया। कांग्रेस के विधायकों की खरीद-फरोख्त की। इसके एवज में इन्हें सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के जरिये करारा तमाचा लगाया।

सवाल- मतलब कि आप भी वही करेंगे जो भाजपा कर रही है।

हम तो कुछ नहीं कह रहे। भाजपा सवाल उठा रही है तो हम उन्हें सिद्घांत की राजनीति का आईना दिखा रहे हैं।

सवाल- यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण हैं इसके बावजूद न तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चुनाव प्रचार में उतर रही हैं और न ही प्रियंका गांधी ही अब तक सामने आई हैं। वह भी तब जब प्रियंका के संदर्भ में जोरशोर से चर्चा हुई थी। इसे किस निगाह से देखा जाना चाहिए। 

प्रियंका तो पहले भी कहीं नहीं गईं। मीडिया में ही चर्चा हुई थी। मीडिया में चर्चा चलती रहती है। सोनियाजी आपको पता है कि कहीं नहीं जा रही। आगे क्या होगा आपको पता चल जाएगा। हमारे उपाध्यक्ष राहुल गांधी जा रहे हैं। उन्होंने कमान संभाल रखी है।

सवाल- मगर आपको नहीं लगता कि इन महत्वपूर्ण चुनावों से कांग्रेस अध्यक्ष की दूरी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आखिर कांग्रेस अध्यक्ष की अपनी छवि और अपना असर है।

 नुकसान होगा नहीं होगा इसके बारे में मैं तो नहीं कह सकता। हम भी चाहते थे कि सोनिया जी चुनाव प्रचार में उतरतीं। नर्हीं आइं तो कोई वजह होगी।
 

'भाजपा ने यहां कांग्रेस के बागियों और दागियों का सहारा लिया'

फाइल फोटो
सवाल- इनके अलावा भी सभी वरिष्ठ नेता चुनाव प्रचार से दूर हैं। आप भी दिल्ली में ही हैं।

पार्टी ने मुझे यहीं कई जिम्मेदारियां दी हैं। मैं उन जिम्मेदारियों को शिद्दत के साथ निभा रहा हूं।

सवाल- इससे पहले भाजपा के खिलाफ  बिहार में महागठंधन का सफल प्रयोग हुआ। मगर आपको नहीं लगता कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन करने में देरी हुई। इस कारण कई समस्याएं अब तक बनी हुई हैं।

गठबंधन के संदर्भ में बिहार और उत्तर प्रदेश की तुलना ठीक नहीं है। आपका कहना सही है वहां गठबंधन की तैयारी बहुत पहले कर ली गई। भाजपा के खिलाफ  सभी ताकतें एकजुट हुई थीं। उत्तर प्रदेश में गठबंधन सिर्फ  कांग्रेस और सपा के बीच है। इसमें बसपा और रालोद नहीं है। हालांकि सपा-कांग्रेस गठबंधन ने लोगों का विश्वास हासिल किया है। युवाओं में खास संदेश गया है। खासतौर पर युवा अखिलेश की नई शुरुआत का संदेश बेहद महत्वपूर्ण है।

सवाल - उत्तराखंड में आपकी पार्टी को सरकार विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। आपको नहीं लगता कि इसका सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा।

यहां भी भाजपा की तथाकथित सिद्घांत की राजनीति उसका रास्ता रोक रही है। भाजपा ने यहां कांग्रेस के बागियों और दागियों का सहारा लिया है। इससे उसके कार्यकर्ता के साथ संघ भी नाराज है। मुझे नहीं लगता कि इस राज्य में भी भाजपा को कुछ हासिल होने वाला है।

सवाल- विकास की राजनीति के बारे में कांग्रेस का नजरिया क्या है।

हमने हमेशा विकास की ही राजनीति की है। ये तो उत्तर प्रदेश में विकास की बात ही नहीं करते। केंद्रीय मंत्री बालियान कहते हैं कि जीतते ही मुस्लिम इलाकों में कर्फ्यू लगा देंगे। क्या यह विकास है। राम मंदिर समान नागरिकसंहिता की बात कर रहे हैं। क्या यह विकास की राजनीति है।

सवाल- यूपीए के कार्यकाल में कई भ्रष्टाचार हुए। वर्तमान सरकार अपने तीन साल के कार्यकाल में एक भी घोटाला न होने को सबसे बड़ी उपलब्धि मान रही है। क्या कांग्रेस अब उस धारणा से बाहर निकल आई है।

कौन सा भ्रष्टाचार हुआ। अब देखिये टूजी स्पेक्ट्रम मामले को जितना तूल दिया गया। उसका क्या नतीजा निकला। अदालत ने कहा कोई मामला ही नहीं है। यूपीए के एक मंत्री का नाम बताइए जिन पर भ्रष्टाचार का आरोप हो। व्यापम घोटाले में क्या हुआ। मेडिकल के सभी प्रवेश रद्द कर दिया सुप्रीम कोर्ट ने।

सवाल- बात संसद की करते हैं। बीते कुछ दिनों से सदन की गरिमा खराब हुई है। दोनों ही ओर से असंसदीय, ओछी बातें कही जा रही हैं। क्या इसके लिए कोई मर्यादा तय नहीं की जानी चाहिए। 

संसद में क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया हो रही है।  जैसा कि गुजरात दंगों के संदर्भ में तत्कालीन सीएम और वर्तमान पीएम मोदीजी ने न्यूटन के गति नियम का हवाला दिया था। हालांकि यह भी बेहद असैद्घांतिक टिप्पणी थी। मगर चुनाव जीतने के बाद जब पीएम पहली बार संसद पहुंचे तो यहां की जमीन को चूमा। उसके बाद कार्यवाही में हिस्सा लेने से भी दूरी बना ली। संसद को ऐसे संबोधित करते हैं जैसे जनसभा में भाषण दे रहे हों। जाहिर तौर पर प्रधानमंत्री के ऐसे व्यवहार की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है।

सवाल- मगर सरकार और भाजपा का कहना है कि कांग्रेस की बहस में कोई दिलचस्पी ही नहीं है। मोदी जी को प्रधानमंत्री के रूप में हजम ही नहीं कर पा रही है।

बहस और माहौल बनाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की है। वह देश के प्रधानमंत्री हैं। मगर खुद उन्हें संसद की परवाह नहीं है। संसद की मर्यादा का खुद उल्लंघन करते हैं। अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। सांसदों को भाइयों, बहनों कह कर संबोधित करते हैं। वह खुद गरिमा नहीं रखेंगे तो ऐसी स्थितियां तो आएंगी ही।
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'वह अपनी नजर में खुद को भाजपा का ही प्रधानमंत्री मानते हैं'

फाइल फोट
सवाल- मतलब आप मानते हैं कि मोदीजी देश के प्रधानमंत्री हैं।

जी बिल्कुल वह देश के पीएम हैं। हम ऐसा ही मानते हैं। मगर वह अपनी नजर में खुद को भाजपा का ही प्रधानमंत्री मानते हैं।

सवाल -आप कह रहे हैं कि साल 2019 में लोकसभा चुनाव में भाजपा-कांग्रेस का आमना सामना होना है। कौन होगा आपका नेता। क्या राहुल के नेतृत्व में पार्टी मैदान में उतरेगी।

नेतृत्व कौन करेगा यह पार्टी तय करेगी। यह पार्टी का विषय है। मगर जहां तक इस सरकार का सवाल है तो जनता अभी से चुनाव का इंतजार कर रही है। इनसे पूछा जाएगा कि पांच साल में किसी एक काम का ही नाम लें, जो इनकी सरकार ने किया हो।

सवाल- महंगाई दर कम हुई है। मुद्रास्फीति की दर कम हुई है। क्या यह उपलब्धि नहीं है।

कहां कम हुई महंगाई। मैं तथ्यों पर बात करुंगा। साल 2014 में चावल 28 रुपये किलो था जो अब 30 रुपये है। आटा 21 रुपये से 25 रुपये। चना दाल 51 रुपये से 126 रुपये। अरहर दाल 76 से 104 रुपयेए मसूर दाल 65 से 84 रुपये। उड़द दाल 65 से 110 रुपये हो गया। चीनी, गुड़, तेल कोई एक चीज तो बताएं जो सस्ती हुई है।

सवाल- डब्ल्यूपीआई, थोक महंगाई बढ़ी है, मगर सीपीआई- खुदरा महंगाई दर घटी है।

दरअसल सवाल है कि नोटबंदी के कारण डिमांड घट गई है। सब्जियां सस्ती हुई हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ है। वह अपनी फसल बाजार तक में नहीं ला पा रहे। इसी का परिणाम है कि हिंदुस्तान के इतिहास में किसानों ने सबसे अधिक आत्महत्या इसी सरकार के कार्यकाल में की है। पेट्रोल-डीजल मामले में भी अंतरराष्ट्रीय कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट के बावजूद यह सरकार लोगों को राहत नहीं दे रही।

सवाल- उत्तर प्रदेश में भाजपा के साथ कांग्रेस भी बसपा के प्रति नरम रुख अपना रही है। क्या ऐसा भविष्य में साथ आने की संभावनाओं के मद्देनजर हो रहा है।

नरम रुख की बात नहीं है। जहां हमारा टकराव भाजपा से है। वहां हम भाजपा के खिलाफ, जहां बसपा है वहां हम उसके खिलाफ  आक्रामक हैं। 

सवाल - क्या बाद में बसपा-कांग्रेस के साथ आने की गुंजाइश रखी जा रही है।

बाद में क्या होगा इसे अभी कैसे बताया जा सकता है। यह तो सिद्घांतों की राजनीति करने वाली भाजपा से पूछिये। संघ तो फिर से आरक्षण खत्म करने की बात कर रहा है।

सवाल- मगर आप बिहार की तर्ज पर इसे मुद्दा बनाने से क्यों परहेज कर रहे हैं।

यहां परिस्थितियां दूसरी हैं। भाजपा यहां सांप्रदायिक कार्ड खेल रही है। खुद प्रधानमंत्री नोटबंदी पर बात नहीं कर रहे। हम तो लगातार उठा रहे हैं। इससे राज्य के उद्योग धंधे बर्बाद हो गए हैं। लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार हुए हैं। हम लगातार इसे मुद्दा बना रहे हैं।
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