पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के उस निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें कहा गया है कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर मौजूद खानपान की दुकानों के मालिकों को अपने मालिकों के नाम खुलासा करना होगा।
ऐसे आदेशों के खिलाफ रोक लगाने की मांग
शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में महुआ मोइत्रा ने दोनों राज्य सरकारों के पारित आदेशों पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा है कि ऐसे निर्देश समुदायों के बीच मतभेद बढ़ाते हैं। याचिका को अभी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना है।
'मुस्लिम दुकानदारों की आजीविका खत्म करने कोशिश'
तृणमूल नेता ने याचिका में कहा कि तीर्थ यात्रियों के आहार विकल्पों का सम्मान करने के कथित आधार पर मालिकों और यहां तक कि उनके कर्मचारियों के नामों का खुलासा करने के लिए मजबूर करना, एक बहाना मात्र है। टीएमसी सांसद की याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऐसा मुस्लिम दुकानदारों और श्रमिकों पर सामाजिक, आर्थिक बहिष्कार थोपने और उनकी आजीविका को खत्म करने के लिए किया गया है।
विवादास्पद आदेश सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार के विवादास्पद आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा। जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ एनजीओ एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स की याचिका पर सुनवाई कर सकती है।
क्या है सरकारों का विवादास्पद आदेश?
मुजफ्फरनगर पुलिस की तरफ से कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी भोजनालयों को अपने मालिकों के नाम प्रदर्शित करने के लिए कहने के कुछ दिनों बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को पूरे राज्य में विवादास्पद आदेश को बढ़ा दिया। वहीं उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अधिकारियों ने रविवार को कहा कि उन्होंने यात्रा को सुचारू रूप से चलाने के लिए विशेष व्यवस्था की है और व्यापक सुरक्षा उपाय किए गए हैं।
कल से शुरू हो रहा है सावन का महीना
इस बीच, हिंदू कैलेंडर के सावन महीने की शुरुआत के साथ सोमवार से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा के लिए कई राज्यों में व्यापक व्यवस्था की गई है, जिसके दौरान लाखों शिव भक्त हरिद्वार में गंगा से पवित्र जल लेकर अपने घर जाते हैं और रास्ते में शिव मंदिरों में इसे चढ़ाते हैं। 22 जुलाई से 19 अगस्त तक चलने वाले भगवान शिव की पूजा के इस विशेष काल में पांच सोमवार शामिल होंगे।