तेजस्वी यादव सच में लालू प्रसाद यादव के असली उत्तराधिकारी हैं। मंच पर भाषण से लेकर राजनीति की गोट बिठाने में माहिर हैं। अपने पिता के आशीर्वाद से उन्होंने सीटों के बंटवारे का मन पक्का कर लिया है। तेजस्वी चाहते हैं कि भाजपा के बागी शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद बिहार में महागठबंधन के पाले में रहकर चुनाव लड़ें। इस अभियान में उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का बल मिल गया है।
कांग्रेस के अखिलेश प्रताप सिंह ने महागठबंधन को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। वह रालोसपा के उपेन्द्र कुशवाहा को न केवल कांग्रेस अध्यक्ष के करीब ले आए, बल्कि लालू से भी मिलवाए। बिहार में 06 सीट देने के लिए राजी भी कराया। कांग्रेस को 12 की बजाय 11 सीट देने पर राजग के नाता सहमत हो गए हैं। हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी को दो ही सीट मिलेगी।
एक सीट पर शरद यादव की पार्टी चुनाव लड़ेगी। 19 सीट पर राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार लोकसभा चुनाव में मैदान में होंगे। एक सीट एक अन्य सहयोगी को देने की योजना है। बताते हैं इसकी घोषणा अब कभी भी हो सकती है।
संघ अब क्या करे?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) बड़ी दुविधा में फंस गया है। उसके कार्यकर्ता जहां मोदी सरकार के कामकाज के रवैय्ये से खीझे हैं, वहीं यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा में भी वह खुश नहीं हैं। ऊपर से राम मंदिर, गाय और गंगा ने उन्हें सवालों के नये मुहाने पर खड़ा कर दिया है। संघ के कार्यकर्ता जिधर निकल रहे हैं, लोग सवाल पूछ रहे हैं। इधर सरकार है कि फेस सेविंग के लिए भी कुछ नहीं कर रही है।
विहिप के नेताओं की भी बोलती बंद है। भैय्या जी जोशी ने 2025 तक राम मंदिर बनकर तैयार हो जाने की घोषणा कर दी, लेकिन इस पर लोगों की प्रतिक्रिया ने संघ को नये सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। आरएसएस प्रमुख अपने बयानों से केन्द्र की भाजपा सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष की टीम काल में तेल डालकर सोई हुई है।
ऐसे में संघ की दुविधा यह है कि वह करे तो क्या? अब 2019 तक राम तो मिलने से रहे, लेकिन राम को छोड़ भी नहीं सकता। मोदी सरकार और भाजपा का क्या करे? इससे तो संघ को काफी उम्मीदें थी और अब.....?
कस लो ईडी तुम भी शिकंजा
जब सरकार की एक एजेंसी चौकस होती है तो दूसरी को भी शिकार मिल जाता है। मामला यूपी का है। सीबीआई में आलोक वर्मा की वापसी के बाद सपा में थोड़ी जान आई थी, लेकिन वह 48 घंटे के भीतर हटा दिए गए। अब खबर है कि मनी लांडरिंग एक्ट के तहत ईडी यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, आईएस अधिकारी बी. चंद्रकला समेत 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रहे हैं। एक नामी अखबार के नामी संपादक भी इसके घेरे में बताए जा रहे हैं।
अखिलेश यादव भले ही राजनीतिक कार्रवाई बताएं, लेकिन उन्हें पता है कि एक बार मामला दर्ज हो जाने के बाद क्या होता है? गर्दन अपनी होती है और कसाव दूसरे का। लेकिन यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री करें भी तो क्या? इधर आईएएस अधिकारी बी चंद्रकला हैं कि उनके शानदार कविताओं ने लोगों के होश उड़ा रखे हैं।
खबर तो यह भी मार्च के पहले तक लोकसभा चुनाव की घोषणा होनी है। इससे पहले ही अखिलेश यादव समेत अन्य को बुलाकर पूछताछ भी की जा सकती है। हो भी क्यों न। मोदी जी लगातार कह रहे हैं कि उन्होंने सरकार धन लूटने वालों पर निगाह रखनी शुरू की तो सब एकजुट होकर महागठबंधन बना रहे हैं।