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दुखद: कन्नड़ साहित्यकार-आलोचक जी वेंकटसुबैया नहीं रहे, 107 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

Mon, 19 Apr 2021 11:21 AM IST
वर्तिका तोलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जी वेंकटसुबैया को पद्म श्री, पम्पा पुरस्कार, साहित्य अकादमी द्वारा भाषा सम्मान, कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार और कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
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जी वेंकटसुबैया - फोटो : ANI
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विस्तार
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कन्नड़ लेखक, संपादक, लेक्सियोग्राफर जी वेंकटसुबैया का सोमवार तड़के बेंगलुरु में 107 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। 


कन्नड़ साहित्यिक क्षेत्र में लोकप्रिय जी वेंकटसुबैया एक लेक्सियोग्राफर, व्याकरणिक और साहित्यिक आलोचक थे। उन्होंने 12 शब्दकोश संकलित किए हैं। उनकी रचनाओं में व्याकरण, कविता, अनुवाद और निबंध सहित कन्नड़ साहित्य के विभिन्न रूप शामिल हैं।

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कन्नड़ में स्नातकोत्तर पूरा करने के बाद, उन्होंने मांड्या के नगरपालिका स्कूल में एक शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। बाद में, वह दावणगेरे के एक हाई स्कूल और मैसूरु के महाराजा कॉलेज में पढ़ाने लगे। 1973 में विजया कॉलेज से सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने मुख्य संपादक के रूप में कन्नड़-टू-कन्नड़ शब्दकोश पर काम करना शुरू किया।
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इतना ही नहीं उन्होंने 2011 में बेंगलुरु में आयोजित 77वें अखिल भारतीय कन्नड़ साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। उनकी स्मारकीय साहित्यिक कृतियों के लिए उन्हें विभिन्न पुरस्कार मिले हैं। जिनमें पद्म श्री, पम्पा पुरस्कार, साहित्य अकादमी द्वारा भाषा सम्मान, कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार और कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार शामिल हैं। 100 साल पार करने के बाद भी उनके उत्साह उतना ही लोकप्रिय रहा।

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