Kanchi Sankaracharya Jayendra Saraswathi
चेन्नई की एक अदालत ने शुक्रवार को कांची शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के साथ 8 अन्य लोगों को 2002 में मठ के ऑडिटर राधाकृष्णन पर हुए हमले के मामले में बरी कर दिया है। बीते माह उन्हें इस मामले में 28 मार्च को कोर्ट में पेश होकर आरोपों का जवाब देने के लिए कहा गया था। कांची शंकराचार्य इस मामले में मुख्य अभियुक्त थे। मामले की सुनवाई करते हुए प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. राजमनिकम ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। जज ने कहा आरोपियों की मौजूदगी नें कहा कि 'मैं आप सभी को बरी कर रहा हूं, आप जा सकते हैं।'
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस मामले में अपनी गवाह से पलटने वाले रवि सुब्रह्मण्यम की सुनवाई अलग से की जाएगी। मामले में कांची मठ शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती, मठ मैनेजर सुंदेरसा अय्यर और मठ के ही एक अन्य पुजारी विजयेंद्र सरस्वती के भाई रघु आपराधिक साजिश के आरोप में प्रमुख आरोपी थे। मामले में अभियोजन पक्ष के अनुसार मठ के पूर्व ऑडिटर एस राधाकृष्णन पर कांची शंकराचार्य के गैंग ने हमला किया था। गैंग को इस बात की आशंका थी कि वो सोमशेखर घनपाडिगल के फर्जी नाम से मठ में कथित तौर पर जारी अनियमितताओं को पत्र के माध्यम से उजागर कर रहे थे।
इस मामले में पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मामले के दो आरोपियों का केस चलने के दौरान ही निधन हो गया था। बीती 28 मार्च को कांची शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अदालत में किए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि उन पर लगाए गए आरोप झूठे हैं।