महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले की कणकवली नगर परिषद में हुए चुनाव में 'राणे बनाम राणे' की दिलचस्प जंग देखने को मिली। शिवसेना नेता नीलेश राणे के समर्थित उम्मीदवार ने भाजपा समर्थित, राज्य मंत्री नितेश राणे के उम्मीदवार को पराजित किया। इस नतीजे ने स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले की कणकवली नगर परिषद के चुनाव नतीजों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहां एक दिलचस्प मुकाबले में शिवसेना नेता नीलेश राणे के समर्थित उम्मीदवार ने अपने ही भाई और राज्य मंत्री नितेश राणे भाजपा के समर्थित उम्मीदवार को उनके गढ़ में शिकस्त दे दी। इस चुनावी परिणाम को 'राणे बनाम राणे' की जंग के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने स्थानीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
चुनाव परिणामों के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नीलेश राणे ने इसे खुशी और दुख का मिला-जुला क्षण बताया। उन्होंने कहा, 'एक तरफ जीत की खुशी है, तो दूसरी तरफ अपनों की हार का दुख भी है। उन्होंने कहा हमारा गठबंधन और परिवार पहले की तरह ही एकजुट रहेगा। गठबंधन वैसा ही रहेगा, भाजपा हमारा परिवार है और उनकी हार मेरे लिए दुख की बात है। मैं किसी की हार का जश्न नहीं मना रहा हूं, क्योंकि वे मेरे अपने हैं।'
बता दें कि सिंधुदुर्ग जिले में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले दोनों सहयोगियों के बीच तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली थी। नीलेश राणे ने चुनाव के दौरान भाजपा पर 'धनबल' (पैसे की ताकत) का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप भी लगाया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत ने नीलेश राणे के स्थानीय प्रभाव को मजबूत किया है।