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कर्जमाफी और मध्यप्रदेश की कंगाली वाले बयान पर कमलनाथ और शिवराज आए आमने-सामने

Tue, 18 Dec 2018 01:28 PM IST
पूजा मेहरोत्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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कमलनाथ बनाम शिवराज - फोटो : अमर उजाला
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मध्यप्रदेश में कमलनाथ के मुख्यमंत्री पदभार संभालते ही सियासी भूचाल शुरू हो गया है। मौजूदा और पूर्व दोनों ही मुख्यमंत्री में बयानबाजी भी तेज हो गई है। पदभार संभालते ही एक ओर जहां कमलनाथ ने 2 लाख तक लोन वाले किसानों की कर्जमाफी वाले पेपर पर हस्ताक्षर किया वहीं कहा कि उन्हें सरकारी खजाना पूरी तरह से खाली मिला है। इसपर पलटवार करते हुए सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने राज्य की स्थिति बेहतर बताई है और कहा है कि किसानों की कर्जमाफी नहीं चाहिए बल्कि उन्हें अपने पसीने का पूरा पैसा चाहिए। 

पदभार संभालते ही कमलनाथ ने किसानों के पेपर पर किए हस्ताक्षर

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सूबे की कमान संभालते ही सबसे पहले लोन लिए किसानों को सौगात दी। उन्होंने पदभार संभालते ही सीएम ऑफिस पहुंचे और सबसे पहले उन किसानों की लोन वाली फाइल पर पेन चलाया जिसका वादा उन्होंने चुनावी वचन पत्र में किया था। और उन्होंने किसानों को किया वादा निभाया। कमलनाथ ने दो लाख रुपये तक के किसानों के लोन को माफ कर दिया है।

किसान लोन माफी को लेकर उठ रहे सवालों पर कमलनाथ ने कहा था कि मैं वाणिज्य और उद्योग मंत्री रह चुका हूं और मुझे मालूम है कि अर्थव्यवस्था कैसे चलती है। इस राज्य के 70 प्रतिशत लोगों की जिंदगी खेती पर निर्भर करती है। केवल किसान ही नहीं, ऐसे भी बहुत से लोग हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में सब्जी की दुकान चलाते हैं और दूसरे खेतों में ट्रैक्टर चलाते हैं। ऐसे भी गरीब लोग हैं जो कृषि क्षेत्र में मजदूरी का काम करते हैं। लोन माफी पर उन्होंने यह भी कहा कि अगल उद्योगपतियों का लोन माफ हो सकता है तो किसानों का क्यों नहीं। 
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किसानों की इस लोन माफी से सरकारी खजाने में अतिरिक्त भार बढ़ने जा रहा है और इसी बीच कमलनाथ ने दो और बयान दिया है जिसने सियासी भूचाल मच गया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि सरकार की ओर से केवल उन्हीं उद्योगों को अनुदान दिया जाएगा जिनसे मध्यप्रदेश के स्थानीय लोगों को रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि बिहार और उत्तरप्रदेश के लोग रोजगार के लिए यहां आते हैं, जिस वजह स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलता।

बता दें कि पिछले दिनों हुए सभी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस समर्थित राज्यों में जहां भी सरकार बनी है उसमें पार्टी ने किसानों को कर्ज माफी को बड़ा मुद्दा बनाया और लोन माफी का वादा किया और माफ भी किया। 

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शिवराज ने कहा हमने किसानों का खजाना भरा रहे इसके लिए शुरू की योजनाएं

Shivraj KamalNath and Jyotiraditya - फोटो : PTI
किसानों की कर्जमाफी चुनावों में हमेशा से ही बड़ा मुद्दा रही है। अगर यह इतना ही आसान था तो मौजूदा सूबे की सरकारों ने इस मुद्दे को क्यों नहीं भुनाया। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से जब पूछा गया कि अगर किसान लोन माफी से चुनाव जीता जा सकता था तो भाजपा ने किसानों से ऐसा वादा क्यों नहीं किया? जबकि उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान भाजपा ने किसानों से वादा किया और जीते भी।

इसपर शिवराज सिंह ने कहा कि किसान कभी भी मुफ्त का कुछ भी नहीं चाहते हैं वह अपने पसीने की पूरी कीमत चाहते हैं। किसानों को खैरात पसंद नहीं है। किसानों की गरिमा का सम्मान करते हुए मैंने कई योजनाएं शुरू की जिससे किसानों के एकाउंट में पैसा जाए। शिवराज ने अपनी मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के बारे में भी बताया जिससे किसानों को काफी फायदा हुआ और होता रहेगा।

लेकिन जैसे ही शिवराज सिंह से पूछा गया कि कमलनाथ ने कहा है कि आपने राज्य का खजाना खाली कर दिया है। राज्य कंगाली की स्थिति में है। तो उन्होंने खंडन करते हुए कहा कि यह सरासर गलत है। खजाना भरा हुआ है। भंडार भरपूर है। इसके लिए मैं कहीं भी बहस कर सकता हूं, मध्यप्रदेश में भरपूर पैसा है उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति किसी भी दूसरे राज्यों से बेहतर हालात में हैं।

शिवराज ने कहा कि हम कभी भी दूसरे राज्यों की तरह ओवरड्राफ्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य की स्थिति बेहतर बनी हुई है। हम वास्तव में नई सरकार के लिए भरा पूरा खजाना छोड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार की कई योजनाओं के लिए हमने भरपूर पैसा छोड़ा है। चाहें वो सड़क हो बिजली हो या फिर किसान की कोई योजना हो या बात करें संभल योजना की जिसे हमने ही शुरू किया था।  
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