बनारसी चावला ने कहा कि मैं चाहता हूं कि पूरी दुनिया कल्पना के किए गए कार्यों से लाभान्वित हो। कल्पना ने अपनी पूरी जिंदगी में करनाल स्थित टैगोर बाल निकेतन विद्यालय से लेकर कॉलेज और विश्वद्यालय तक जहां कहीं भी भाषण दिए, उनसे लोगों को प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री भी आने वाली पीढ़ियों को बड़ा सपना देखने के लिए प्रेरित करेगी।
बता दें कि चावला अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं। इस डॉक्यूमेंट्री में कल्पना का वह साक्षात्कार भी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके निधन के बाद उनकी राख या तो हिमालय या फिर उटाह के सिय्योन नेशनल पार्क में बिखेर दी जाए।
कल्पना का जन्म साल 1962 में करनाल में हुआ था। वह साल 2003 में दुर्घटनाग्रस्त हुए अंतरिक्ष यान के चालक दल के सात सदस्यों में से एक थीं। उनका अंतरिक्ष कोलंबिया के आसमान में पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।