मुजफ्फरनगर के खतौली में ट्रेन हादसे के बाद रेलवे की लापरवाही साफ नजर आ रही है। हालांकि, अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने जांच के आदेश दिए हैं। इसी बीच, सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें रेलवे के दो कर्मचारी इस घटना के संबंध में आपस में फोन पर बातचीत कर रहे हैं।
ऑडियो में गेटमैन और खलासी के बीच बातचीत बताई जा रही है। जिसमें दोनों की बातचीत से स्पष्ट है कि रेलवे की लापरवाही के कारण ये हादसा हुआ है। बातचीत में कहा गया है कि ट्रैक पर मरम्मत के काम के लिए पटरियों को खोला गया था। जिसके बाद इसे ठीक नहीं किया जा सका और इसी बीच ट्रेन आ गई। जिसके चलते ये हादसा हो गया।
खतौली रेल हादसाः चौतरफा हमलों से घिरे प्रभु ने दिया आदेश- शाम तक बताओ, गुनहगार कौन?
गेटमैन बता रहा है कि सुरक्षा के लिए न कोई सिग्नल दिया गया और न ही लाल झंडा लगाया गया। उसने आगे बताया कि पटरी पर काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी लापरवाही बरतते हैं। उसका आरोप है कि कर्मचारी साइट पर आते हैं और बैठे रहते हैं।
मुजफ्फरनगर रेल हादसाः 10 क्लिक में जानिए हादसे की सारी बड़ी बातें
इतना ही नहीं इस शख्स का ये भी कहना है कि हाल ही में यहां नए जेई की नियुक्ति हुई है और पुराने कर्मचारी उनकी बात नहीं मानते हैं और मनमानी करते हैं। यानी जो लापरवाही की बात शुरुआती जांच में सामने आ रही थी, गेटमैन के इस ऑडियो क्लिप ने उसे और पुख्ता कर दिया है। हालांकि, इस ऑडियो क्लिप की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
पिछले पांच साल में हुई 586 रेल दुर्घटनाएं
रेल मंत्री सुरेश प्रभु
रेलवे के सुरक्षा ढांचे को बेहतर बनाने के प्रयासों के बावजूद पटरी से उतरने के कारण होनेवाली दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं। उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना सहित पिछले पांच साल में देश में 586 रेल धुर्टनाएं हुई हैं, जिनमें करीब 53 फीसदी घटनाएं ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण हुई।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में शनिवार शाम उत्कल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसमें 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 156 अन्य घायल हो गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच साल में 586 रेल दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें से 53 फीसदी घटनाओं का कारण ट्रेन का पटरी से उतरना रहा है। नवंबर 2014 से अभी तक 20 रेल दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें से कई साधारण घटनाएं थीं।
सबसे भीषण दुर्घटना 20 नवंबर 2016 को इंदौर-पटना एक्सप्रेस के कानपुर के पास पटरी से उतरने की थी, जिसमें 150 लोग मारे गए और 150 से अधिक लोग घायल हुए। 12 सितंबर 2015 को कालका से शिमला जाने वाली शिवालिक क्वीन पटरी से उतर गई थी, इसमें दो पर्यटकों की मौत हुई थी और 15 अन्य घायल हुए थे। 4 अगस्त 2015 को कामायनी एक्सप्रेस और जनता एक्सप्रेस की हुई दोहरी रेल दुर्घटना में 31 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 100 से अधिक घायल हो गए थे।
दोनों ट्रेन पटरी से उतर गई थीं। इससे पहले भी पटरी से उतरने की वजह से कई ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिसमें काफी लोगों की मौत हुई।