कालीगंज बम धमाके में मारी गई नाबालिग बच्ची की मां ने कथित धमकियों और मुकदमे में देरी से परेशान होकर आत्महत्या की कोशिश की। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हालत स्थिर है। पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन परिवार का आरोप है कि कई आरोपी अब भी फरार हैं।
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कालीगंज में हुए बम धमाके ने एक परिवार की जिंदगी उजाड़ दी थी। छह महीने बाद भी इंसाफ की राह साफ न होने से पीड़िता के परिवार का दर्द और बढ़ गया है। धमाके में मारी गई नाबालिग बच्ची की मां ने कथित धमकियों और मुकदमे में देरी से परेशान होकर आत्महत्या की कोशिश की है।
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परिजनों के मुताबिक, कक्षा चार की छात्रा तमन्ना खातून की मां सबीना यास्मीन ने मंगलवार रात नींद की गोलियां खा लीं। उन्हें तुरंत कृष्णानगर के शक्तिनगर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत स्थिर है और वह खतरे से बाहर हैं। परिवार का आरोप है कि आरोपियों से मिल रही धमकियों और जांच में सुस्ती ने सबीना को इस हाल तक पहुंचा दिया।
कैसे हुई घटना?
तमन्ना खातून की मौत 23 जून को हुई थी, जिस दिन कालीगंजविधानसभा उपचुनाव के नतीजे आए थे। आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस की जीत के जश्न के दौरान मोलेण्डी गांव में फेंका गया बम फट गया। धमाके में तमन्ना की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने पूरे राज्य में गुस्सा और शोक पैदा कर दिया था।
सरकार और पुलिस की कार्रवाई
घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। पुलिस ने अब तक कम से कम 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि परिवार का कहना है कि कई आरोपी अभी भी फरार हैं और यही सबसे बड़ी चिंता है।
परिवार का डर और आरोप
तमन्ना के चाचा रबीउल शेख ने कहा कि बच्ची की मौत के बाद से सबीना मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुकी हैं। उनका कहना है कि खुले घूम रहे आरोपी परिवार को लगातार डरा रहे हैं। परिवार को आशंका है कि अगर गिरफ्तार आरोपी जमानत पर बाहर आए तो उनकी जान को खतरा हो सकता है।
इलाज और मानसिक हालत
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, सबीना यास्मीन पिछले कुछ समय से अवसाद में थीं और नींद की गोलियां ले रही थीं। कथित तौर पर अधिक मात्रा में गोलियां लेने से उनकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल उनकी स्थिति नियंत्रण में है। परिवार पुलिस जांच की रफ्तार से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मुकदमे में देरी और आरोपियों की संभावित जमानत से न्याय और सुरक्षा दोनों खतरे में हैं।