केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी
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केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने बुधवार को किसानों से नए कृषि कानूनों को अपनाकर देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को इसमें कोई दिक्कत आती है या पसंद नहीं आते हैं तो सरकार इसमें संशोधन कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीनों नए कृषि कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगाए जाने के एक दिन बाद उनका यह बयान आया है।
कृषि कानूनों को ऐतिहासिक सुधार बताते हुए उन्होंने किसानों से सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति पर विश्वास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुछ समय के लिए किसान नए कानूनों को अपनाकर देखें और यदि उन्हें यह पसंद नहीं आता है तो हम इन कानूनों में संशोधन कर सकते हैं।
अन्यथा लोग यह मानेंगे कि उनका आंदोलन राजनीति से प्रेरित है। किसानों से आग्रह है कि वे किसी की कठपुतली न बनें और मुद्दे का समाधान निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति के समक्ष पेश हों।
समिति में कानून समर्थक सदस्यों के होने के आरोप पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पर नहीं तो किसान किससे पर भरोसा करेंगे? उनका सरकार पर विश्वास नहीं है, न कि सुप्रीम कोर्ट तो वे किससे पर विश्वास करेंगे? उन्हें भरोसा करने की आवश्यकता है और हाथ जोड़कर उनसे आग्रह है कि वे वार्ता की मेज पर आएं।
क्या वे कहना चाहते हैं कि वे स्वामीनाथन समिति नहीं चाहते हैं या फिर वे अपनी फसलों को कहीं भी बेचना की आजादी नहीं चाहते हैं? यदि पुरानी नीतियां इतनी ही अच्छी हैं तो किसान अभी तक गरीब क्यों हैं और खुदकुशी क्यों कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सभी को स्वीकार करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई समिति सुझाव लेगी और अपनी रिपोर्ट देगी। हठ से कोई मदद नहीं होगी। देश में करोड़ों किसान है जो तीनों कानूनों का समर्थन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों को अपने मुद्दे समिति के सामने बताने चाहिए।