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कानों देखी: क्या बिहार के अरविंद केजरीवाल बन पाएंगे प्रशांत किशोर?

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प्रशांत किशोर और अरविंद केजरीवाल - फोटो : पीटीआई
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बिहार में नवंबर महीने में चुनाव नतीजे आने हैं। इस चुनाव के लिए प्रशांत किशोर (पीके) ने पूरी ताकत झोंक दी है। उन्हें भरोसा है कि 2005 से लगातार सत्ता में बने हुए नीतीश कुमार को वह सत्ता से हटा देंगे। चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर जन सुराज पार्टी के बैनर तले काफी खर्च कर रहे हैं। उनके खर्च पर भी पटना की सड़कों पर तरह-तरह की चर्चा है। हालांकि, राजद के संस्थापक शिवानंद तिवारी को पीके का सितारा बहुत चमकने की उम्मीद नहीं है। जदयू के वरिष्ठ नेता उन्हें दिल्ली के इशारे किसी दल विशेष को फायदा पहुंचाने वाला बता रहे हैं। कांग्रेस के विधायक शकील अहमद तो साफ कहते हैं कि भाजपा की बी टीम हैं। वहीं, पीके के एक और करीबी का कहना है कि देखिएगा, अरविंद केजरीवाल ने जैसे शीला दीक्षित को दिल्ली  से हटाया था, उसी तरह पीके नीतीश को उखाड़ फेकेंगे?
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भाजपा को जल्द मिलेगा नया अध्यक्ष
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बहुत हार्ड बार्गेनर हैं। जोखिम बहुत संभलकर और तैयारी के साथ उठाते हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर उनके सामने एक चुनौती थी, लेकिन बताते हैं कि इस चुनौती को समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने बहुत आसान कर दिया। अखिलेश ने लोकसभा में भाजपा के अध्यक्ष न चुन पाने पर तंज कस दिया। इस तंज का केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बड़ी चतुराई से जवाब दे दिया। लेकिन पूरा मामला संघ के बड़े नेताओं और रणनीतिकारों तक चला गया। खबर है कि आगामी चुनौतियों को देखते हुए संघ ने भी अपना तेवर थोड़ा बदल लिया है। संघ चाहता है कि अब जल्द नए भाजपा अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो जाए। धीरे-धीरे पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए जरूरी 17 राज्यों में अध्यक्ष के चुनाव का लक्ष्य पूरा कर रही है। ऐसे में जल्द ही संघ की पृष्ठभूमि के किसी चेहरे की ताजपोशी के साथ इसे पूरा कर लिया जाएगा।

अमेठी के मृदुभाषी सांसद किशोरी लाल शर्मा का संकट
कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने लोकसभा चुनाव में पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को हराया था। चुनाव हारने के बाद से ईरानी को अभी तक कुछ बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली। उन्होंने राहुल गांधी पर आक्रमण की धार को कुंद किया है। रचनात्मक कार्यों में लग गई हैं। छवि बना रही हैं और धमाकेदार वापसी की तैयारी है। लेकिन किशोरी लाल शर्मा का संकट बढ़ रहा है। अमेठी की जनता 1980 के दशक से काम करवाने की अभ्यस्त हो चुकी है। इधर उत्तर प्रदेश और केन्द्र में भाजपा की सरकार है। किशोरी लाल पत्र तो लिखते हैं, लेकिन उन पत्रों को अहमियत नहीं मिल पा रही है। ऊपर से अमेठी के भाजपाई भी मुस्करा देते हैं। अब बताइए, किशोरी बाबू करें तो क्या?    
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क्या दक्षिण में खिलेगा कमल?
भाजपा ने मिशन दक्षिण पर काफी जोर दिया है। तमिलनाडु में अभी भाजपा 10 साल बाद की सोच रही है। कर्नाटक और केरल में कोशिशें काफी तेज होंगी। कर्नाटक को लेकर संगठन महासचिव बीएल संतोष भी काफी संवेदनशील हैं। पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की उम्र बढ़ रही है। दूसरे नेताओं के विकल्प बन रहे हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वहां के बारे में अभी से सोचना शुरू कर दिया है। भाजपा केरल में भी अब खाता खोलने की बड़ी रणनीति बना रही है। रही बात तमिलनाडु की तो वहां भाजपा ने नया अध्यक्ष चुन लिया है। तमिलनाडु में बड़े भाई की भूमिका में एआईएडीएमके ही रहेगी, लेकिन भगवा पार्टी की नजर कुछ बड़े बागियों की संभावना पर टिक गई है। ताकि डीएमके को ढंग की चुनौती दी जा सके।    

जोश ही नहीं होश में चलने पर ही लगेगी कांग्रेस की नैया पार
कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी भूमिका बढ़ानी शुरू की है। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं और पार्टी छोड़कर गए कुछ नए पुराने चेहरों से संपर्क साधा है। पार्टी के भीतर भी मंथन की गुंजाइश बन रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कुछ चिंताओं पर कांग्रेस ने अमल करना शुरू कर दिया है। जल्द ही इसका नतीजा दिखाई देगा। बताते हैं अहमदाबाद चिंतन से कुछ निकलकर आया है और कांग्रेस ने बिहार, बंगाल, असम, पंजाब समेत आगामी विधानसभा चुनावों को साधने के लिए अभी से काम करना शुरू कर दिया है। बंगाल में अधीर रंजन चौधरी के भी कुछ सुझाव हैं और असम में गौरव गगोई, प्रद्युम्न बरदोलोई कुछ अलग कर सकते हैं। ताकि भाजपा के प्रभाव को समेटा जा सके।
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