जस्टिस वर्मा के घर नकदी मिलने का खुलासा हुआ था। जिस पर खासा विवाद हुआ। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीके उपाध्याय ने मामले की शुरुआती जांच की। जिसके बाद जस्टिस वर्मा को न्यायिक जिम्मेदारियों के निर्वहन से रोक दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जांच समिति ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के घर से नकदी की बरामदगी के आरोपों की पुष्टि कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा से रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर पद छोड़ने की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश ने जांच समिति की रिपोर्ट जस्टिस वर्मा को भेजी है और उनसे जवाब मांगा है।
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जांच समिति ने दी रिपोर्ट
तीन सदस्यों वाली जांच समिति ने 3 मई को अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंपी। जांच समिति में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधवालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की जस्टिस अनु शिवरामन शामिल रहीं। सूत्रों ने कहा कि 13 मई को सेवानिवृत्त होने वाले सीजेआई खन्ना इस मुद्दे को तार्किक निष्कर्ष पर ले जाने की संभावना है और उन्होंने शीर्ष अदालत के वरिष्ठ कॉलेजियम सदस्यों के साथ रिपोर्ट के निष्कर्षों पर अनौपचारिक रूप से चर्चा की है।
दिल्ली स्थित आवास पर मिली थी नकदी
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि की है कि जस्टिस वर्मा के घर के स्टोर रूम में आग लगने के बाद भारी संख्या में नकदी बरामद हुई थी। हालांकि जस्टिस वर्मा ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को दिए जवाब में अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारा था। जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर यह नकदी बीती 14 मार्च को बरामद हुई थी। उस वक्त जस्टिस वर्मा दिल्ली उच्च न्यायालय में नियुक्त थे, लेकिन विवाद के बाद उनका इलाहाबाद उच्च न्यायालय तबादला कर दिया गया।
एक मीडिया रिपोर्ट से जस्टिस वर्मा के घर नकदी मिलने का खुलासा हुआ था। जिस पर खासा विवाद हुआ। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीके उपाध्याय ने मामले की शुरुआती जांच की। जिसके बाद जस्टिस वर्मा को न्यायिक जिम्मेदारियों के निर्वहन से रोक दिया गया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय तबादले के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय को न्यायिक काम नहीं देने का निर्देश दिया था।