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CJI:'जस्टिस राम के विनम्र व्यक्तित्व ने मुझे प्रभावित किया', सीजेआई चंद्रचूड़ ने विदाई देते हुए किया यह खुलासा

Fri, 19 May 2023 06:10 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम 29 जून को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। 22 मई से गर्मी की छुट्टी के कारण शीर्ष अदालत बंद रहेगी। इसलिए शुक्रवार को न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम के अंतिम कार्य दिवस पर विदाई देने के लिए सीजेआई ने एक औपचारिक पीठ का नेतृत्व किया।
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CJI DY Chandrachud - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम के विनम्र व्यक्तित्व को लेकर उनकी प्रशंसा की और कहा कि वो एक बहु-प्रतिभाशाली न्यायाधीश और इंसान हैं। न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम 29 जून को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। 

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शीर्ष अदालत 22 मई से गर्मी की छुट्टी के लिए बंद रहेगा। इसलिए शुक्रवार को न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम के अंतिम कार्य दिवस पर विदाई देने के लिए एक औपचारिक पीठ का नेतृत्व करते हुए सीजेआई ने कहा कि न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम देश और राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं है।

सीजेआई ने कहा, जस्टिस राम के विनम्र व्यक्तित्व ने मुझे प्रभावित किया। मैं उनसे तब से प्रभावित हूं जब उन्हें न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। वह वास्तव में एक बहुआयामी और बहुप्रतिभाशाली न्यायाधीश और इंसान हैं। 
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इस दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ ने खुलासा किया कि उन्होंने न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम से किसी भी न्यायाधिकरण की अध्यक्षता करने का अनुरोध किया है, लेकिन वह तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, मैं एक राज बताऊंगा। मैं जस्टिस राम को किसी भी ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष बनने के लिए मनाने के लिए संघर्ष कर रहा हूं, जो उपलब्ध है। लेकिन उन्होंने मुझे बताया कि उनकी इच्छा एक स्वतंत्र नागरिक बनने की है।

सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि वह न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम को उनकी विनम्र अपील को स्वीकार करने के लिए मनाने के अपने प्रयासों पर कायम हैं। चंद्रचूड़ ने न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम के मजाकिया अंदाज का बखान किया। वहीं, सीजेआई का आभार व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यन ने कहा कि आम तौर पर विदाई के दौरान वक्ताओं द्वारा आंसू बहाया जाता है, लेकिन वह ऐसा नहीं चाहते।

30 जून, 1958 को जन्मे न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन ने मद्रास लॉ कॉलेज में कानून का अध्ययन किया और 16 फरवरी, 1983 को बार के सदस्य के रूप में नामांकन के वकालत शुरू की। न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन 31 जुलाई, 2006 को मद्रास हाईकोर्ट  के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में और 9 नवंबर, 2009 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन को 27 अप्रैल, 2016 को हैदराबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने 22 जून, 2019 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन 23 सितंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था।

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