नामित मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि देशभर की अदालतों में लंबित पांच करोड़ से अधिक मामलों का बोझ घटाना और विवाद समाधान के वैकल्पिक तरीके के रूप में बेहद प्रभावी मध्यस्थता को बढ़ावा देना न्यायपालिका प्रमुख के रूप में उनकी प्राथमिकता होगा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों के खिलाफ की जाने वाली टिप्पणियों को अनसोशल मीडिया करार दिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष आलोचना हमेशा स्वीकार्य होती है।
पत्रकारों से बात करते हुए जस्टिस कांत ने कहा कि मैं बहुत आशावादी हूं। मेरा ध्यान केवल सुप्रीम कोर्ट ही नहीं, बल्कि देशभर की उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों में लंबित मामलों पर होगा। वे ऐसे मामलों की पहचान करेंगे, जिनकी वजह से उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में भी मुकदमे रुके हैं। साथ ही वर्षों से लंबित पुराने मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह बेहतर न्यायिक परंपरा होगी कि वादी पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएं और उसके बाद ही सर्वोच्च न्यायालय आएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता को जागरूक किया जाना चाहिए कि हाईकोर्ट भी सांविधानिक न्यायालय हैं।
सरकारी संस्थानों में मध्यस्थता की संस्कृति विकसित होनी चाहिए
जस्टिस कांत ने मध्यस्थता को गेम चेंजर बताते हुए कहा कि इससे लंबित मामलों में बड़ी कमी लाई जा सकती है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बैंक संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि उनके अधिकारियों को इन हाउस मध्यस्थता प्रशिक्षण दिया जाए। उनका मानना है कि सरकारी संस्थानों में भी मध्यस्थता की संस्कृति विकसित की जानी चाहिए।
न्याय व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर उन्होंने कहा कि इसके प्रति अभी कुछ भय और आशंकाएं हैं। वादी चाहते हैं कि उनका मामला न्यायाधीश ही सुनें, इसलिए एआई की सीमा को सोच-समझकर तय करना होगा। 24 नवंबर को राष्ट्रपति भवन में जस्टिस सूर्यकांत भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। मौके पर भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल, श्रीलंका और ब्राजील आदि देशों के मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीश मौजूद रहेंगे।