वकीलों के तेज आवाज में बहस करने से नाराज होकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सिकरी ने बुधवार को मामले की सुनवाई करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट को अब ऐसे वकीलों के खिलाफ सख्ती करनी होगी। एक हफ्ते के अंदर यह दूसरा मौका है जब सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने तेज आवाज में बहस करने को लेकर अपनी आपत्ति जताई है।
जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ के सामने यह मामला घटा। पीठ पर्ल एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) के मामले की सुनवाई कर रही थी। पीएसीएल की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी दलील पेश कर रहे थे। इसी दौरान प्रतिवादी की ओर से पेश एक महिला वकील तेज आवाज में बोलने लगी। इस पर जस्टिस सिकरी ने महिला वकील से कहा कि जब वरिष्ठ वकील बोल रहे हैं तो उनका शोर मचाने का कोई कारण नहीं बनता। उन्होंने कहा कि वह बहुत धैर्यवान व्यक्ति हैं लेकिन इस तरह की बहस से एलर्जी है। वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते।
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जस्टिस सिकरी ने कहा कि अब शोर मचाने वाले वकीलों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने की जरूरत है जिससे कोर्ट में अनुशासन और शिष्टता बनी रहे। यह टिप्पणी करते हुए पीठ ने मामले की सुनवाई करने से इनकार कर दिया है और फरवरी में इसे सुनने का निर्णय लिया है। इस दौरान सिंघवी ने कहा कि दूसरे की गलती के लिए पीएसीएल को नुकसान नहीं होना चाहिए लेकिन पीठ ने अपने फैसले में बदलाव करने से मना कर दिया।
इससे पहले सात दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने भी शोर मचाने वाले वकीलों को चेतावनी दी थी कि ये सब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि तेज आवाज में बहस करने का मतलब है कि उस वकील के पास बहस करने के लिए तथ्यों का अभाव है।