भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने राज्यसभा मनोनयन को स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा सदस्य के तौर पर सोमवार को उन्हें नामित किया था। अपने मनोनयन पर गोगोई ने कहा, 'मैं संभवत कल दिल्ली जाऊंगा। मुझे पहले शपथ लेने दीजिए। इसके बाद मैं विस्तार से मीडिया से बात करुंगा कि आखिर मैंने ऐसा क्यों किया और मैं राज्यसभा क्यों जा रहा हूं।'
कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों ने जस्टिस गोगोई के मनोनयन पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि उन्हें इसे स्वीकार करने से मना कर देना चाहिए क्योंकि इससे न्यायापालिका की निष्पक्षता पर प्रभाव पड़ेगा। वहीं कुछ नेताओं ने उन्हें उनके पुराने बयान याद दिलाते हुए इस मनोनयन को अस्वीकार करने की सलाह दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की गरिमा बनाए रखने के लिए की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने देश के सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा बनाए रखने के लिए भी आवाज उठाई। जनवरी 2018 में तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कार्य प्रणाली से नाराज गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य जजों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट के जज एकसाथ न्यायालय के आंतरिक मामलों को लेकर मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से आए थे।