आपको बता दें, शुक्रवार को चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस के बाद ये मामला एक बार फिर सुर्खियों में आया था। प्रेस कांफ्रेंस में जजों ने सवालों के जवाब देते हुए कहा था कि हां जज लोया की मौत का मामला भी उनकी बेचैनी, विरोध और असंतोष की वजह है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमएन शांतनगौडार की अदालत में होनी थी। जस्टिस शांतागौडार निजी कारणों से छुट्टी पर रहे, जिसके चलते सुनवाई आज होनी थी और इसकी तारीख टल कर एक हफ्ते के लिए और बढ़ गई है।
इस मामले में चीफ जस्टिस ने रोस्टर तय करने के अधिकार के तहत तहसीन पूनावाला की ओर से दाखिल याचिका को जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच के पास सुनवाई के लिए भेजा था। इस बेंच ने याचिका में उठाये गये मुद्दों को गंभीर बताते हुए अगली सुनवाई पर महाराष्ट्र सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल को हाजिर होने को कहा था। जज लोया की मौत पर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। शुक्रवार को चार जजों ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, उसमें जजों के रोस्टर तय करने पर भी सवाल उठाए गए थे और जस्टिस लोया केस का जिक्र भी किया गया था।
गौरतलब है कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सीबीआई के स्पेशल जज बीडी लोया सुनवाई कर रहे थे। दिसंबर 2014 में नागपुर में एक समारोह में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने के बाद उनका निधन हो गया। मौत की वजह और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जैसे कई मसलों को लेकर सवाल उठाये जाते रहे हैं।