टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम के चुनाव नतीजों को फिर से मतगणना कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई। कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कौशिक चंद ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसले को सुरक्षित रख लिया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की दोबारा मतगणना कराने की मांग वाली याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति कौशिक चंद की अदालत में सीएम ममता बनर्जी की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील रखी। इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वर्चुअल तौर से हाजिर हुईं। दलील सुनने के बाद जस्टिस कौशिक चंद ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया। उन्होंने कहा कि कानून के तहत इस पर फैसला सुनाया जाएगा। हालांकि, जज की ओर से फैसला सुनाने की तारीख का जिक्र नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में चुनाव बाद हुई मतगणना में धांधली का आरोप लगाते हुए फिर से मतगणना कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। साथ ही हाईकोर्ट की इस बेंच से अपने केस बदलने की मांग की।
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बता दें कि मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए थे। 2 मई को चुनाव नतीजे घोषित किए गए। ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ी थीं। उनके खिलाफ भाजपा नेता और उन्हीं के पूर्व सहयोगी सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें 1957 वोटों से हरा दिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने दावा किया कि मतगणना के दौरान धांधली की गई और मतगणना में लगे अधिकारियों को भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी और उनके अन्य सहयोगियों ने जान से मारने तक की धमकी दी। ममता बनर्जी ने कोलकता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इधर ममता बनर्जी के वकील संजय बसु ने कहा कि कोर्ट के सामने कई सबूत पेश किए गए। हम चाहते हैं कि इस बेंच से यह केस का ट्रांसफर हो और फैसले का इंतजार करेंगे।
ममता बनर्जी ने न्यायाधीश पर भाजपा के करीबी होने का लगाया आरोप
इसके अलावा टीएमसी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर दूसरी अदालत में मामला ट्रांसफर करने की मांग की थी। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने पार्टी और मुख्यमंत्री की मांग को दरकिनार करते हुए मामले को दूसरी अदालत में शिफ्ट नहीं किया। इससे पहले इस मामले पर सुनवाई में न्यायमूर्ति कौशिक चंद ने कहा था नियमानुसार याचिका लगाने वाले को कोर्ट में मौजूद रहना पड़ता है तो क्या मुख्यमंत्री कोर्ट में मौजूद रहेंगी ? इसके बाद मुख्यमंत्री ने न्यायमूर्ति की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा किया था और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के साथ उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर भगवा पार्टी के करीबी होने का आरोप लगया था। साथ ही ममता बनर्जी द्वारा दाखिल नंदीग्राम मामले को दूसरे न्यायाधीश की अदालत में शिफ्ट करने की याचिका लगाई गई थी।