आवासन विभाग ने उनका आवास खाली कराने के लिए बीते महीने न्यायिक विभाग के सचिव को एक पत्र भेजा था। उसके जवाब में न्यायमूर्ति कर्णन ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आठ जजों के खिलाफ उनका फैसला लागू नहीं होने तक उनसे सरकारी आवास खाली नहीं कराया जा सकता। उनके मुताबिक उक्त फ्लैट उनके आवास और अस्थायी अदालत के तौर पर काम करता है।
आवासन विभाग ने अपने पत्र में कहा था कि सेवानिवृत्त होने के बावजूद न्यायमूर्ति कर्णन ने अब तक अपना फ्लैट खाली नहीं किया है। सेवारत जजों के लिए तय उक्त फ्लैट को खाली करना जरूरी है। इसके कुछ दिनों बाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के दफ्तर ने कर्णन को एक पत्र भेज कर उनका ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया था। अब न्यायमूर्ति कर्णन ने आवासन विभाग और रजिस्ट्रार जनरल को भेजे गए अपने जवाब में उक्त बातें कही हैं।
कर्णन ने कहा है कि सेवानिवृत्ति से पहले आठ फरवरी, 2017 से उनको अदालती कामकाज करने की अनुमति नहीं दी गई थी। इससे नाराज होकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आठ जजों को सजा सुनाई थी। उनकी दलील है कि उक्त आदेश का अब तक पालन नहीं हो सका है। ऐसे में फिलहाल अस्थायी अदालत के तौर पर काम कर रहे उक्त फ्लैट को खाली करना उनके लिए संभव नहीं है।
ध्यान रहे कि बीते साल मई में न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर समेत आठ जजों को पांच साल की सजा और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
कर्णन ने कहा है कि वे कानून का पालन करने वाले जिम्मेदार नागरिक हैं और मकान मालिक के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। उन्होंने कहा है कि वे उक्त फ्लैट का किराया देने को तैयार हैं और अगर मकान मालिक उसे बेचना चाहे तो वे इसे खरीदने के लिए भी तैयार हैं।