देश के चीफ जस्टिस (सीजेआई) दीपक मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले जस्टिस जे चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट में अपने आखिरी कार्य दिवस में कोर्ट नंबर एक में उनके साथ बैठे। जस्टिस चेलमेश्वर 22 जून को अपने पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट में 19 मई से 2 जुलाई तक ग्रीष्मावकाश रहेगा। इसके चलते शुक्रवार को कोर्ट का आखिरी कार्य दिवस था। इन दोनों के साथ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी मौजूद थे।
कई दिन से लग रहे कयासों को गलत साबित किया
सुप्रीम कोर्ट में यह परंपरा है कि सेवानिवृत्त होने वाला हर न्यायाधीश अपने कार्य दिवस के अंतिम दिन सीजेआई के साथ कोर्ट नंबर एक में बैठता है। जस्टिस चेलमेश्वर और सीजेआई के बीच अहम मुद्दों के आवंटन, उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति की सिफारिश समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद खुलकर सामने आए थे। इन्हीं मतभेदों के चलते वकीलों और जजों के बीच कयास लगाए जा रहे थे कि क्या जस्टिस चेलमेश्वर सीजेआई के साथ बैठेंगे या नहीं।
हाथ जोड़कर कोर्ट रूम में मौजूद सभी से ली विदाई
कोर्ट नंबर एक में शुक्रवार सुबह वकीलों और वादियों के साथ बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। हालांकि इस दौरान किसी मामले की सुनवाई नहीं हुई। सीजेआई, जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस चंद्रचूड़ की पीठ 11.25 बजे तक बैठी। वरिष्ठ वकील राजीव दत्ता, प्रशांत भूषण और गोपाल शंकरनारायण ने इस दौरान विदाई भाषण भी दिया। कोर्ट रूम छोड़ने से पहले जस्टिस चेलमेश्वर ने हाथ जोड़कर सभी से विदाई ली।
सीजेआई के खिलाफ की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस
सुप्रीम कोर्ट में दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस चेलमेश्वर ने तीन अन्य वरिष्ठ जजों के साथ सीजेआई के खिलाफ 12 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासनिक कार्य ठीक से नहीं हो रहा है। उन्होंने मामलों के आवंटन और इसके कामकाज को लेकर सीजेआई पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। उनके मुताबिक, शिकायतों पर ध्यान नहीं देने के चलते उन्हें मीडिया के सामने आना पड़ा।
केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं
23 जून 1953 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे चेलमेश्वर की शुरुआती पढ़ाई कृष्णा शहर में ही हुई थी। उन्होंने मद्रास लोयोला कॉलेज से फिजिक्स से स्नातक किया। 1976 में उन्होंने विशाखापट्टनम की आंध्र यूनिवर्सिटी से कानून की शिक्षा हासिल की। 1995 में वह वरिष्ठ वकील बने और 13 अक्तूबर 1995 को एडिशनल एडवोकेट जनरल के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई। 23 जून 1997 को वह आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एडिशनल जज बने और 17 मई 1999 को जज। मार्च 2010 में जस्टिस चेलमेश्वर ने केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का कार्यभार संभाला। अक्तूबर 2011 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने।