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जाते-जाते न्यायपालिका पर सरकार को ये नसीहत देकर गए जस्टिस चेलमेश्वर 

Fri, 22 Jun 2018 09:20 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस जे चेलमेश्वर शुक्रवार को अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने कहा कि जिसके पास सत्ता होती है, वह हमेशा न्यायपालिका को नियंत्रित करने की कोशिश करता है।

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हर सरकार, चाहे मौजूदा सरकार हो या कोई और। यहां तक अमेरिका में भी ऐसा होता है। हम देख चुके है जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी रूजवेल्ट ने कहा था कि अदालत को पैक करो। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की स्वतंत्रता नितांत आवश्यक है। 

जस्टिस चेलमेश्वर उन चार वरिष्ठ न्यायाधीश में से एक थे जिन्होंने केस के आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इस साल 12 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। केस के आवंटन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी भी प्रक्रिया में तार्किकता होनी चाहिए। 
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केसों के आवंटन का कोई तो आधार होना चाहिए। क्या यह पूरी तरह से लॉटरी है या कोई तार्किक प्रक्रिया? उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं। हमने इस पर कोई सवाल नहीं उठाया क्योंकि कोई न कोई तो संस्थान को संगठित करने वाला होना ही चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस अधिकार का इस्तेमाल किस तरह से होना चाहिए? यही बात हमने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाई थी। उन्होंने ये बातें पत्रकारों के एक समूह को दिए साक्षात्कार में कहीं। 

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जस्टिस जोसेफ के मुद्दे पर जताया खेद

उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने के लंबित मुद्दे पर जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि उन्हें इस बात का खेद है कि हमारे अथक प्रयास के बावजूद एक अच्छा जज सुप्रीम कोर्ट अब तक नहीं पहुंच सका।

अपना पक्ष कोलेजियम के समक्ष रख चुका हूं। चूंकि अब मामला कोलेजियम के पास लंबित है, लिहाजा वह इस पर और टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि कोलेजियम सिस्टम में और पारदर्शिता की जरूरत है। 

राजनीति में नहीं आएंगे

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि वह भविष्य में किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे। उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्होंने अपना सरकारी आवास खाली कर दिया है और विजयवाड़ा चले गए हैं।
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