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Hijab Row: जस्टिस हेमंत गुप्ता ने प्रतिबंध को क्यों सही ठहराया? कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर क्या बोले, जानें

Thu, 13 Oct 2022 04:40 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कर्नाटक हिजाब मामले में जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब बैन को सही ठहराया है। वहीं जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के बैन जारी रखने के आदेश को रद्द कर दिया।
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जस्टिस हेमंत गुप्ता - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कर्नाटक में शिक्षण संस्थानों में हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने अलग-अलग फैसला सुनाया है। जिसके चलते मामले को बड़ी बेंच को भेज दिया गया है। जहां जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब बैन को सही ठहराया है। वहीं जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के बैन जारी रखने के आदेश को रद्द कर दिया। आइए जानते हैं आखिर जस्टिस हेमंत गुप्ता ने बैन को क्यो सही ठहराया है? उन्होंने क्या तर्क देकर हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है?

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जस्टिस हेमंत गुप्ता ने 11 सवाल उठाए और हिजाब बैन को सही ठहरा दिया
जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि हमारी राय अलग है। मेरे आदेश में 11 सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या छात्रों को अनुच्छेद 19, 21, 25 के तहत वस्त्र चुनने का अधिकार दिया जा सकता है? अनुच्छेद 25 की सीमा क्या है? व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार की व्याख्या किस तरह से की जाए?  क्या कॉलेज छात्रों की यूनिफॉर्म पर फैसला कर सकते हैं? क्या हिजाब पहनना और इसे प्रतिबंधित करना धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन है (अनुच्छेद 25)? क्या अनुच्छेद 25 और अनुच्छेद 19 (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) परस्पर अनन्य हैं? क्या कर्नाटक प्रतिबंध मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है? क्या हिजाब पहनना इस्लाम के तहत आवश्यक अभ्यास का हिस्सा है? क्या सरकारी आदेश शिक्षा तक पहुंच के उद्देश्य को पूरा करता है? क्या अपील को संविधान पीठ को भेजा जाना चाहिए?



न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता सभी नागरिकों पर लागू होती है। एक धार्मिक समुदाय को धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति देना धर्मनिरपेक्षता का विरोधी होगा। सरकार के आदेश को धर्मनिरपेक्षता या कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के उद्देश्य के खिलाफ नहीं कहा जा सकता है।
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न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा ने कहा कि छात्रों को अनुच्छेद 21 के तहत शिक्षा का अधिकार है, लेकिन अपने धर्म के एक हिस्से के रूप में एक धर्मनिरपेक्ष स्कूल में यूनिफॉर्म के अतिरिक्त कुछ पहनने पर जोर देने का नहीं। सरकारी आदेश केवल यह सुनिश्चित करता है कि छात्रों द्वारा निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन किया जाए।

न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता है कि राज्य इस तरह के आदेश के माध्यम से छात्राओं की शिक्षा तक पहुंच को प्रतिबंधित कर रहा है। जस्टिस गुप्ता का अवलोकन तब आया जब उन्होंने सभी अपीलों और रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया।

कौन हैं जस्टिस हेमंत गुप्ता?
जस्टिस हेमंत गुप्ता मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। जस्टिस गुप्ता पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जज और पटना हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट में जज बनाए गए। हाई कोर्ट में जज की सेवानिवृत्ति आयु 62 है। सुप्रीम कोर्ट जस्टिस 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।

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