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सीजेआई ने न्यायपालिका और जजों की आजादी बरकरार रखने के लिए ‘मौन मंत्र’ का संदेश दिया

Fri, 15 Nov 2019 11:08 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जस्टिस रंजन गोगोई (फाइल फोटो)
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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने शुक्रवार को अपने आखिरी कार्यदिवस पर न्यायपालिका और जजों की आजादी बरकरार रखने के लिए ‘मौन मंत्र’ का संदेश दिया। 17 नवंबर को रिटायर हो रहे जस्टिस गोगोई ने जारी किए गए अपने नोट में कहा, वकीलों को बोलने की स्वतंत्रता है और यह होनी चाहिए। मगर, पीठ के जजों को स्वतंत्रता का प्रयोग मौन रहकर करना चाहिए। जजों को अपनी स्वतंत्रता कायम रखने के लिए मौन रहना चाहिए। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्हें चुप रहना चाहिए, बल्कि जजों को अपने दायित्वों के निर्वाह के दौरान ही बोलना चाहिए, बाकी वक्त उन्हें मौन ही रहना चाहिए।

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जस्टिस गोगोई ने अपने सहयोगी जजों को कहा, जेहन में हमेशा कड़वा सत्य बना रहना चाहिए। मैंने एक ऐसे संस्थान के साथ जुड़ने का फैसला किया जिसकी ताकत ही जनमानस का भरोसा और विश्वास है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इंसाफ तक आम आदमी की पहुंच हो और उसे यह लगे कि इंसाफ से उसे जुदा नहीं किया जा सकता। कार्यकाल के आखिरी दिन मीडिया संस्थानों की ओर से साक्षात्कार दिए जाने की अपील पर सीजेआई ने उनके लिए भी एक नोट जारी किया।

उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान मीडिया से मिले सहयोग और व्यवहार के लिए आभार जताते हुए कहा, फिलहाल अभी एक-एक करके सबसे मुलाकात संभव नहीं होगा, जिसके आप गरिमा के साथ हकदार हैं। सीजेआई ने कहा, मैं रिटायरमेंट के बाद पत्रकारों से मिलना चाहूंगा और साझा मसलों पर बात करना चाहूंगा। जस्टिस गोगोई ने कहा, प्रेस ने दबाव के समय न्यायपालिका की साख को ठेस पहुंचानेवाली झूठी खबरों के खिलाफ सही रुख अपनाया। उन्होंने कहा, कई अहम और कठिन मौकों पर मीडिया ने परिपक्वता दिखाई, असाधारण विवेक का इस्तेमाल किया और झूठी जानकारी नहीं फैलने दी। सत्य के रखवाले और लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी की भी भूमिका उन्होंने निभाई। तीन अक्तूबर, 2018 को देश के 46वें मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने वाले जस्टिस गोगोई का कार्यकाल 13 माह से ज्यादा रहा।
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प्रेस वार्ता को किया याद

जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन 4 जजों में शामिल थे, जिन्होंने मीडिया के सामने आकर प्रेस वार्ता की थी। कार्यकाल के आखिरी दिन उन्होंने इस मौके को भी याद करते हुए कहा प्रेस के सामने जाने का विचार कभी एक चुनाव करने की तरह नहीं था। दरअसल, 12 जनवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट के चार जज वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ मीडिया के सामने आए थे और कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ठीक से काम नहीं कर रहा है। उस समय जस्टिस दीपक मिश्रा सीजेआई थे।

चार मिनट में 10 नोटिस

जस्टिस रंजन गोगोई शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के कक्ष संख्या एक में पीठ में अंतिम बार शामिल हुए। इस दौरान वह महज चार मिनट के लिए इस पीठ में बैठे। चार मिनट में ही जस्टिस गोगोई ने अपने समक्ष लाए गए 10 मामलों में नोटिस जारी किए। पीठ में उनके अलावा जस्टिस एसए बोबडे भी थे, जो देश के अगले मुख्य न्यायाधीश बनने वाले हैं। 

13 माह में 47 फैसले, 4 सबसे अहम

अयोध्या भूमि विवाद: जस्टिस गोगोई ने रिटायर होने से पहले देश के सबसे लंबे समय से चले आ रहे अयोध्या विवाद का समाधान कर दिया। उनकी पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में कहीं और 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया।

आरटीआई के दायरे में सीजेआई दफ्तर: जस्टिस गोगोई ने रिटायर होने से पहले कुछ शर्तों के साथ मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में लाने का फैसला दिया। कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि सीजेआई का ऑफिस भी पब्लिक अथॉरिटी है। पारदर्शिता के मद्देनजर न्यायिक स्वतंत्रता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

सबरीमाला: केरल के सबरीमाला विवाद को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका को जस्टिस गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने बहुमत से बड़ी बेंच को सौंप दिया। फिलहाल मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का फैसला बरकरार रहेगा। अब 7 जजों की बेंच इस मामले में सुनवाई करेगी।

राफेल पर पुनर्विचार याचिकाएं खारिज: राफेल सौदे की जांच के लिए दाखिल कई पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए जस्टिस गोगोई की पीठ ने सरकार को क्लीन चिट देते हुए कहा, मामले की अलग से जांच करने की कोई जरूरत नहीं है।



बार एसोसिएशन ने जताया आभार 

इससे पहले उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश खन्ना ने बार की तरफ से प्रधान न्यायाधीश के प्रति आभार व्यक्त किया। भारत के प्रधान न्यायाधीश के तौर पर न्यायमूर्ति रंजन गोगोई का कार्यकाल रविवार 17 नवंबर को खत्म हो रहा है। उन्होंने तीन अक्तूबर को देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली थी।
 


आखिरी कार्यदिवस पर जस्टिस गोगोई राजघाट भी पहुंचे और उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।  न्यायमूर्ति गोगोई बाद में सभी उच्च न्यायालयों के 650 न्यायाधीशों और 15,000 न्यायिक अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की।  
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