जस्टिस चंद्रचूड़ ने दीवान से कहा कि जैसे ही हम सवाल करते हैं तो हम पर इस कदर हमला किया जाता है जैसे हम किसी विचारधारा के प्रति समर्पित हैं। अगर ऐसा है तो वह इस आरोप को स्वीकार करते हैं। हम यहां न तो सरकार का बचाव करने के लिए बैठे हैं और न ही किसी एनजीओ की लाइन पर चलने के लिए।
वकील दीवान ने कहा, सरकार को अपने नागरिकों पर भरोसा नहीं
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील दीवान ने कहा कि सरकार को अपने नागरिकों पर भरोसा नहीं है। एक उदारवादी लोकतांत्रिक देश में सुशासन के लिए राज्य को अपने नागरिकों पर भरोसा होना चाहिए। लोगों से जबरन बॉयोमीट्रिक लेना संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ है। बिना किसी कानूनी प्रावधान के तहत लोगों से उनकी अंगुलियों के निशान लिए गए। आखिर रोजमर्रा के काम के मसलों के लिए आधार को जरूरी कैसे बनाया जा सकता है।
सिब्बल और जस्टिस सीकरी के बीच बहस
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि एक राष्ट्र-एक पहचान का सिद्धांत नहीं हो सकता। इस पर पीठ ने कहा कि लोगों की सत्यनिष्ठा की वजह से यह परेशानी हुई है।
संविधान पीठ के सदस्य जस्टिस एके सिकरी ने कहा कि मुख्य समस्या देश की जनसंख्या है। इसके जवाब में सिब्बल ने कहा कि एक देश, एक पहचान के बाद एक देश, एक बच्चा होना चाहिए। तब सिकरी ने कहा कि 70 के दशक में परिवार नियोजन का कार्यक्रम अच्छा था।
एक जज होने के नाते हम किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। समुदाय हमारे बारे में क्या सोचता है, इससे हमें कोई वास्ता नहीं है। हम यहां संवैधानिक कर्तव्य निभाने के लिए हैं न कि किसी को खुश करने के लिए। संवैधानिक दायरे में हम अपने जमीर को ध्यान में रखते हुए काम करते हैं।
- जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सदस्य