सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार देने के खिलाफ याचिकाओं पर जवाब देने के लिए सिर्फ दो हफ्ते की मोहलत दी है। कलकत्ता हाईकोर्ट के 22 अप्रैल के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में 33 याचिकाएं लंबित हैं। इसमें बंगाल सरकार की तरफ से दायर एक याचिका भी शामिल है।
शीर्ष कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ को सूचित किया गया कि कई पक्षों ने अभी जवाबी हलफनामा दायर नहीं किया है। राज्य सरकार ने भी उन मामलों में जवाब दाखिल नहीं किया है जहां उसे प्रतिवादी बनाया गया है। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ठीक है, हम उन्हें एक मौका देंगे। कोई भी प्रतिवादी अगर दो हफ्ते के भीतर जवाब नहीं देता तो हलफनामा दायर करने का अधिकार समाप्त हो जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने इन पर अंतिम सुनवाई के लिए तीन महीने बाद का समय तय किया है।
हाईकोर्ट ने 2014 में भर्ती प्राथमिक शिक्षकों के पैनल का ब्योरा मांगा
उधर, कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के विभिन्न सरकारी स्कूलों के लिए 2014 में भर्ती किए गए प्राथमिक शिक्षकों के पैनल का ब्योरा मांगा। जस्टिस अमृता सिन्हा की एकल पीठ ने संबंधित अधिकारियों को अगले 15 दिनों के भीतर यह जानकारी पीठ को मुहैया कराने को कहा। बंगाल में वर्ष 2014 में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के माध्यम से कुल 42,000 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती की गई थी। हालांकि, एक अभ्यर्थी ने भर्ती पैनल को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
ओएमआर शीट बनाने वाली एजेंसी के कर्मचारियों से पूछताछ...शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में सीबीआई अधिकारियों ने मंगलवार को एस बसु एंड कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की, जो 2017 में बंगाल के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा में इस्तेमाल की गई आप्टिकल मार्क रिकाग्निशन (ओएमआर) शीट उपलब्ध कराने वाली एजेंसी है। यह पूछताछ पिछले सप्ताह सीबीआई की ओर से कंपनी के दो सर्वरों सहित 36 इलेक्ट्रानिक गैजेट्स को जब्त करने के बाद हुआ है। केंद्रीय एजेंसी ने डिलीट ओएमआर शीट्स का डाटा रिकवर करने के लिए सर्वरों को हैदराबाद स्थित सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) में भेज दिया है।