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Kolkata Case: जूनियर डॉक्टर्स का बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र, कहा- उनकी मांगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई

Thu, 26 Sep 2024 04:31 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

पश्चिम बंगाल में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में जूनियर डॉक्टर 42 दिन बाद अपना प्रदर्शन खत्म करके काम पर लौट आए थे। 
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कोलकाता की घटना के विरोध में प्रदर्शन। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर की हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने काम शुरू करने के बाद बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत को पत्र लिखा है। पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फोरम (डब्ल्यूबीजेडीएफ) के पदाधिकारियों ने पत्र में कहा है कि वह 42 दिनों के बाद काम पर वापस लौट आए, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 

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डॉक्टरों ने कहा कि 18 सितंबर को मुख्य सचिव मनोज पंत ने बैठक के दौरान विशेष टास्क फोर्स के समक्ष उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताई थी। डॉक्टरों ने राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में खतरे को देखते हुए केंद्रीय जांच समिति के गठन की मांग दोहराई।

इसके साथ ही अलग-अलग कॉलेजों के लिए कॉलेज-स्तरीय जांच समिति के गठन की मांग की। इसमें स्नातक छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों को शामिल करने के लिए कहा। इसके अलावा डब्ल्यूबीजेडीएफ ने स्वास्थ्य सिंडिकेट चलाने के आरोपी पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल (डब्ल्यूबीएमसी) और पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य भर्ती बोर्ड (डब्ल्यूबीएचआरबी) के सदस्यों के खिलाफ एक जांच समिति बनाने की मांग की। कहा कि यह काम सात दिनों में होना चाहिए। 
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इसके अलावा जूनियर डॉक्टरों ने प्रत्येक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक कॉलेज-स्तरीय टास्क फोर्स या निगरानी समिति की स्थापना के साथ-साथ सभी भर्ती किए गए चिकित्सा कर्मियों के लिए एक उचित और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की। 

पश्चिम बंगाल में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में जूनियर डॉक्टर 42 दिन बाद अपना प्रदर्शन खत्म करके काम पर लौट आए थे। जूनियर डॉक्टर केवल इमरजेंसी ड्यूटी पर लौटने के लिए राजी हुए थे। जबकि ओपीडी अभी भी बंद रहेगी।

डॉक्टरों ने कहा था कि वे मृतक डॉक्टर के लिए न्याय और राज्य के स्वास्थ्य सचिव को हटाने की मांगों को प्रशासन द्वारा पूरा करने के लिए अगले सात दिनों तक का इंतजार करेंगे। अगर उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे एक बार फिर से काम बंद कर प्रदर्शन करेंगे। 
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