रात हो या दिन, सड़क हो या सिनेमा हॉल, वो उम्र में मुझसे बड़ा हो या छोटा, अगर मुझे वो पसंद है तो उसके साथ व़क्त बिताना मेरी मर्जी है। और मेरी इस मर्जी के लिए मैं आजाद भी हूं, जिम्मेदार भी। अपनी सुरक्षा के लिए, अपने फैसले के लिए, अपनी खुशी और गम के लिए।
धोखा तो मर्द भी खाते हैं पर उनकी सुरक्षा के लिए सरकारें और पुलिस दोहरी नहीं हो जातीं। उन्हें समझदार और शक्तिशाली समझा जाता है। हम औरतों को अक्सर नासमझ और कमजोर। पर हम खुद को कुछ और ही समझती हैं।
उत्तर प्रदेश में चली 'एंटी रोमियो मुहिम' के बारे में जब एक कॉलेज जानेवाली लड़की से मैंने पूछा तो बोलीं, "इतना डर थोड़े ही है, घूमती-फिरती हूं मैं कई दोस्तों के साथ, समझदार हूं, और कोई हमें खा थोड़े ही जाएगा"।
बलात्कार के 95 फीसदी से ज्यादा मामलों में परिवार या जाननेवाले पर
गलत मत समझिएगा। औरतें ये नहीं कहतीं कि उन्हें सड़क पर गश्त लगाती पुलिस की जरूरत नहीं या वो देर रात अकेले जाने में महफूज महसूस करती हैं। हिंसा का, छेड़छाड़ का, बलात्कार का डर तो है और उसके लिए पुलिस-कानून की जरूरत भी है।
पर जब हम जानते हैं कि राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े पिछले कई दशकों से बता रहे हैं कि बलात्कार के 95 फीसदी से ज्यादा मामलों में परिवार या जाननेवाले ही आरोपी होते हैं तो 'स्क्वाड' की जरूरत सड़क पर नहीं घर पर ज्यादा महसूस होने लगती है।
उत्तर प्रदेश के ही कॉलेज की एक और छात्रा ने मेरी आंखों में आंखे डाल कर सीधे-सीधे पूछा था, "बताइए, घर पर कौन सुरक्षित है?" "वहां तो हम अकेले ही जूझ रहे हैं। जिसके बारे में किसी से कुछ कह पाना भी मुश्किल है।" जब अक्सर घर, परिवार, समाज और बिरादरी की इज्जत का वास्ता देकर हमें चुप करा दिया जाता है। हमें अपने ऊपर ये इज्जत का बोझ लादे जाने से दिक्कत है।
कीप काम एंड कैरी ऑन
घर हो या बाहर, क्यों बार-बार कोशिश होती है हमारे फैसले नियंत्रित करने की, हमारे आजाद खयालों को कैद करने की? हमें परेशानी है तो केवल मनचलों से बचाए जाने के नाम पर हमारे रिश्तों की जांच होने से। खौफ के इस माहौल से उलझन है, जो आखिर में हमें फिर घर की दहलीज में धकेलेगा।
जब मेरी सुरक्षा के लिए कोई स्क्वाड ना हो, मेरे पिता या भाई ना हों, और फिर मुझे कह दिया जाए कि अब तुम असुरक्षित हो.. लंदन की दुकानों पर अक्सर एक पोस्टर दिख जाता है जिस पर लिखा रहता है, "कीप काम एंड कैरी ऑन", यानी शांत रहो और आगे बढ़ते रहो।
दूसरे विश्व युद्ध से पहले ब्रितानी सरकार ने ये पोस्टर हौसलाअफजाई के लिए जारी किया था। आज के माहौल में औरतों की सुरक्षा के नाम पर नियंत्रण की ऐसी कोशिशों से बौखलाई मेरी एक दोस्त ने शायद इसीलिए उस पोस्टर को बदला। उसने लिख डाला, "स्टे काम जूलियट्स, गो लुक फॉर योर रोमियोज", यानी सभी जूलीयट शांत रहें और अपना रोमियो ढूंढती रहें।