सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक वकील की खिंचाई करते हुए कहा कि न्यायपालिका इतनी मजबूत है कि वह हजारों पत्थरों के वार झेल सकती है, लेकिन वह इस पर एक भी पत्थर फेंकने की अनुमति नहीं देगा। अदालत ने यह टिप्पणी केरल हाईकोर्ट की अवमानना का मुकदमा झेल रहे एक वकील की अपील पर की।
वकील ने हाईकोर्ट के जजों पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट ने अवमानना के दोष में वकील सीके मोहनन पर तीन माह के कारावास और 1000 रुपये का जुर्माना लगाया था। जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने वकील मोहनन के खिलाफ आपराधिक अपील की सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट की प्रतिक्रिया मांगी है।
साथ ही उसने टिप्पणी की कि न्यायपालिका इतना मजबूत है कि वह हजारों पत्थर सह सकता है, लेकिन शीर्ष अदालत एक भी पत्थर उछालने नहीं देगी। मोहनन के वकील ने दावा किया कि अवमानना का नोटिस पूर्वाग्रह से ग्रसित था, क्योंकि इसे जारी करने में जजों ने प्रक्रियाओं को दरकिनार किया।
वकील को सुनाई गई सजा और जुर्माने के बारे में पीठ ने कहा कि उसका मानना है कि तीन माह की अवधि उनके लिए बहुत कम है। पीठ ने कहा कि आपको लंबी अवधि के लिए जेल जाना चाहिए। आपके व्यवहार के लिए केरल के पूरे बार काउंसिल ने आपका बहिष्कार किया है।