सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को टिप्पणी की कि क्या किसी व्यक्ति के अपराध करने का मकसद जांच का मसला हो सकता है क्योंकि एक शब्द से सार्वजनिक व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। कोर्ट ने यह बात टीवी न्यूज एंकर अमीश देवगन की सूफी संत पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कही।
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने एंकर की ओर से पेश वकीलों और एफआईआर दर्ज कराने वाले राज्यों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
देवगन के खिलाफ सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के खिलाफ 15 जून के कार्यक्रम में की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर राजस्थान समेत कई राज्यों में एफआईआर दर्ज है। देवगन के वकीलों ने कहा, 'किसी एफआईआर में यह नहीं कहा गया कि बयान से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी। इसके साथ ही उन्होंने अपनी टिप्पणी पर पहले ही माफी मांग ली है।' कोर्ट ने देवगन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई है। पीठ ने याचिकाकर्ता और प्रतिवादियों को एक हफ्ते में लिखित जवाब देने को कहा है।