सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 30 सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ 14 अपीलें दायर की गई हैं, जिन पर वह सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान के बीच समान रूप से बंटवारा करने का आदेश दिया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मई 2011 में हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के साथ ही अयोध्या में विवादित स्थल यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया था।
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गत आठ मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद का बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए मध्यस्थता पैनल का गठन किया था। गत 11 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने पैनल को 18 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। बाद में मध्यस्थता पैनल को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक अगस्त तक का वक्त दिया गया था।
पैनल में जस्टिस कलीफुल्ला के अलावा अध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर और मध्यस्थता विशेषज्ञ वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू हैं। शुरुआत से ही अधिकतर हिंदू पक्षकारों का कहना था कि मध्यस्थता के जरिए इसका समाधान नहीं निकल सकता, लिहाजा अदालत को मेरिट के आधार पर सुनवाई करनी चाहिए। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी मध्यस्थता के जरिए इसका हल निकालने की कोशिश की थी लेकिन उस वक्त भी यह कोशिश नाकाम रही थी।