भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को कहा कि न्यायाधीश समाज की पीड़ा को सिर्फ फैसले सुनाकर नहीं, बल्कि लोगों की बातों को सहानुभूति से सुनकर भी ठीक करते हैं। वह 79वें स्वतंत्रता दिवस पर मेघालय उच्च न्यायालय में आयोजित समारोह को समारोह को संबोधित कर रहे थे। चंद्रचूड़ यहां मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।
उन्होंने कहा, कभी-कभी किसी नागरिक को धैर्य से सुन लेना ही एक तरह का उपचार होता है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि स्वतंत्रता केवल औपनिवेशिक शासन से मुक्ति नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा की आंतरिक आजादी भी है। उन्होंने युवाओं से भारत की विविधता की रक्षा करने की अपील की और कहा कि उनकी उद्यमशील ऊर्जा को आत्म-प्रेरणा में बदलना होगा।
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पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने मेघालय उच्च न्यायालय की सराहना की और उसे 'सुशासन का प्रहरी' और नागरिकों व कानून के बीच एक सेतु बताया। उन्होंने देश की शिक्षा, बुनियादी ढांचे और खाद्य आत्मनिर्भरता में हुई प्रगति की भी प्रशंसा की। उन्होंने गुवाहाटी और शिलांग के बीच बेहतर संपर्क को विकास का प्रतीक बताया।
इससे पहले, मेघालय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आईपी मुखर्जी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस मौके पर न्यायमूर्ति एच एस थांगखिएव, डब्ल्यू डिएंगदोह और बिस्वदीप भट्टाचार्य सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, अदालत के कर्मचारी और गणमान्य लोग मौजूद थे। अपने संबोधन में न्यायमूर्ति मुखर्जी ने कहा कि कर्तव्य सबसे अहम है, न कि उसका फल। उन्होंने कहा, कर्म हमारे हाथ में है, फल नहीं।
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उन्होंने अदालत की बुनियादी सुविधाओं और कर्मचारियों की कार्यक्षमता की सराहना की। साथ ही राज्य में न्यायपालिका को और मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। दोनों न्यायमूर्तियों ने अपने संबोधन का समापन इस अपील के साथ किया कि एक न्यायपूर्ण, समावेशी और सशक्त भारत के निर्माण में सभी को सामूहिक रूप से जिम्मेदारी निभानी चाहिए, जहां विविधता का सम्मान हो और हर नागरिक देश के भविष्य को आकार देने में योगदान दे।